उत्तराखंड के भीमताल-मुक्तेश्वर इलाके में होटल प्रोजेक्ट पर रोक, सुप्रीम कोर्ट बोला- जंगल की जमीन है – Uttarakhand myuttarakhandnews.com

Hotel project banned in Bhimtal-Mukteshwar area of Uttarakhand, Supreme Court said - it is forest land

Latest posts by Sapna Rani (see all)देहरादून: उत्तराखंड में बड़े होटल प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी गई है। जंगल की आग ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है। एक बार फिर प्रचंड गर्मी के कारण जंगलों में आग भड़क रही है। जंगल की आग को रोकने के लिए निवारक कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें विफल रहने के कारण उत्तराखंड सरकार को दोषी ठहराने के कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने भीमताल-मुक्तेश्वर क्षेत्र में एक बड़े होटल प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में दर्ज एक याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रभावित इलाके जिलिंग में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होगी।जस्टिस एएस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने बीरेंद्र सिंह की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया। उन्होंने उत्तराखंड हाई कोर्ट की ओर से दी गई हरी झंडी को चुनौती दी थी। जिलिंग एस्टेट में साइट पर किसी भी प्रकार के पेड़ की कटाई और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना प्रस्तावक को छह सप्ताह के भीतर याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को तय की गई है।याचिकाकर्ता ने दी ये दलीलयाचिकाकर्ता की ओर से वकील पीबी सुरेश और विपिन नायर ने तर्क दिया कि 2006 के पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना के तहत प्रस्तावक को अनिवार्य पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद भी ‘सिंगल-विंडो क्लीयरेंस’ के आधार पर साइट पर निर्माण गतिविधियों की अनुमति देकर हाई कोर्ट ने गलती की। वकील ने कहा कि अगर घने जंगलों वाले हिस्से को एक होटल परियोजना के लिए वनों को काटने की अनुमति दी गई तो इलाके में अपूरणीय क्षति होगी।वकील ने कहा कि 20,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों को पूरा कराया जाना है। इससे क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति होगी। इससे इलाके में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पर्याप्त वन आवरण बनाए रखना राज्य का हित है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हर साल लगने वाली जंगल की आग को नियंत्रित करने में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।एससी का आया है आदेशसुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि हाई कोर्ट की ओर से पारित 23 नवंबर 2022 का अंतरिम आदेश अगले आदेश तक लागू रहेगा। हाई कोर्ट ने अपने 9 अप्रैल के फैसले में 23 नवंबर 2022 को दी गई अंतरिम रोक को हटा दिया था। हाई कोर्ट ने ‘देवन्या होटल एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ को निर्माण की अनुमति दे दी थी। हाई कोर्ट ने आदेश में कहा था कि प्रतिवादियों की भूमि का कोई भी हिस्सा वन क्षेत्र में नहीं आता है। इसलिए, निर्माण कंपनी 17 फरवरी 2022 को दी गई अनुमति के अनुसार निर्माण करने के लिए बाध्य हैं। अगर निर्माण 20,000 वर्ग फुट से अधिक किया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी के पास कानून के अनुसार उचित कदम उठाने का अधिकार होगा।

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