

Uttarakhand’s ‘precious’ fruit, sweet and sour and full of taste; being sold at Rs 600 per kgइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)देहरादून। पहाड़ का रसीला खट्टा-मीठा, स्वास्थ्यवर्धक और स्वाद से भरपूर काफल बिक्री के लिए दून पहुंच गया है। इस बार धनोल्टी और टिहरी के जंगलों में कम आग लगने के कारण मोटे और रस से भरपूर काफल हुआ है।बाजार में काफल का दाम बीते वर्ष के मुकाबले इस बार डेढ़ गुना अधिक हैं। बीते वर्ष जहां 400 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा था, वहीं इस बार 600 रुपये पहुंच गया है। ईसी रोड, डिस्पेंसरी रोड, धर्मपुर आदि क्षेत्रों में इन दिनों स्टाल लगाकर काफल की काफी बिक्री हो रही है। पेट से जुड़ी तमाम तरह की परेशानियों को खत्म करने वाला काफल की लोग खरीदारी कर रहे हैं।चैत्र के महीने में उत्तराखंड के जंगलों में पेड़ों पर फल के रूप में लगने वाला काफल प्रारंभिक अवस्था में गहरा हरा और पककर लाल हो जाता है। इसका गुठली युक्त फल गुच्छों में लगता है। अप्रैल मध्य तक यह फल पककर तैयार हो जाता है।आजकल देहरादून के घंटाघर, राजपुर रोड, पथरीबाग चौक, ईसी रोड, सुभाष रोड, चकराता रोड, डिस्पेंसरी रोड, मसूरी रोड समेत विभिन्न जगहों में ठेली व रेहड़ी पर काफल 600 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। स्थानीय लोग व यहां आने वाले पर्यटक खट्टे-मीठे, रसीले काफल का आनंद ले रहे हैं।पिछले 10 वर्षों से काफल बेचने वाले राजेंद्र सिंह ने बताया कि काफल दिखने और खाने में जितना अच्छा लगता है उससे ज्यादा मेहनत उसे तोड़ने में है। इसलिए हर कोई काफल नहीं तोड़ पाता। राजेंद्र सिंह बताते हैं, पिछले कुछ वर्षों में लोगों में काफल खाने का क्रेज बढ़ा है। पहले दिनभर में मुश्किल से पांच से सात किलो ही बिकता था, लेकिन आज की स्थित यह है कि 12 किलो तक निकल जाता है। काफल बेचने वाले पावली सिंह ने बताया कि मसूरी रोड पर पर्यटक आते हैं तो इसे जरूर खरीदते हैं। अधिकांश लोग 100 से 200 ग्राम की खरीदारी करते हैं।काफल खाने के फायदेडायटीशियन दीपशिखा गर्ग के अनुसार, काफल पौष्टिकता से भरपूर होता है।इसमें विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, फाइवर, प्रोटीन आदि प्रचुर मात्रा में मिलता है।इस फल में पेट से जुड़ी तमाम तरह की बीमारियों को खत्म करने की क्षमता है।यह विटामिन सी से भरपूर है जो शरीरी में सूजन कम करता है।एंटी-आक्सीडेंट होने की वजह से इम्युनिटी भी बढ़ती है।यह बाल और त्वचा के लिए लाभदायक है।अस्थमा के मरीज और डाइजेशन के लिए बेहतर है।काले नमक के साथ इसे खाने से हाजमा भी ठीक रहता है।
