उत्‍तराखंड के पहाड़ी जिलों में बढ़ा इस बीमारी का खतरा, 342 मामलों की पुष्टि – myuttarakhandnews.com

अल्मोड़ा । कुमाऊं के पहाड़ी जिलों में जूनोसिस संक्रमण से जुड़ी बीमारियों ने तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। मक्खी, पालतू पशु और अन्य कीटों के माध्यम से फैलने वाला यह संक्रमण अब इंसानों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। जिससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
मेडिकल कालेज में जनवरी 2025 से अब तक कुल 1772 से अधिक जांचें की गईं। जिनमें स्क्रब टाइफस के 271 और ब्रुसेलोसिस के 71 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। संक्रमित मरीजों में अल्मोड़ा के हवालबाग, ताकुला, लगमड़ा, धौलादेवी के अलावा नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लोग भी शामिल हैं।
मेडिकल कालेज के नेशनल वन हेल्थ फार प्रिवेंशन एंड कंट्रोल आफ जूनोसिस यूनिट के नोडल अधिकारी एवं माइक्रोबायोलाजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. विक्रांत नेगी ने बताया कि स्क्रब टाइफस और ब्रुसेलोसिस दोनों ही जीवाणु जनित संक्रमण (बैक्टीरियल इंफेक्शन) हैं। स्क्रब टाइफस संक्रमित पिस्सू कीट के काटने से फैलता है। जबकि ब्रुसेलोसिस आमतौर पर पशुओं के संक्रमित दूध, मांस से होता है। इन बीमारियों के लक्षणों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, और अंगों में सूजन शामिल हैं। समय पर उपचार न होने पर संक्रमण शरीर के अन्य अंगों में फैल सकता है और गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
इलाज और निगरानी के विशेष प्रबंधअल्मोड़ा : इन बीमारियों के उपचार के लिए मेडिकल कालेज स्थित नेशनल वन हेल्थ यूनिट की निगरानी में विशेष इलाज किया जा रहा है। विभाग की ओर से संक्रमण को नियंत्रित करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
अल्मोड़ा : चिकित्सकों की सहभागिता को लेकर मेडिकल कालेज प्रशासन ने चिंता जताई है। जानकारी के अनुसार, मार्च और जून में आयोजित जूनोसिस जागरूकता कार्यक्रमों में जिले के सभी चिकित्सकों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन एक भी चिकित्सक शामिल नहीं हुआ।

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