राह-वीर बनने की सीख देने वाला परिवहन विभाग खुद सवालों के घेरे में, ठाकुरपुर हादसे में घायल पौन घंटे तड़पते रहे – myuttarakhandnews.com

देहरादून: सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना उसकी जान बचाने में बेहद अहम हो सकता है। इसी ‘गोल्डन आवर’ में मदद सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग लोगों को ‘गुड सेमेरिटन’ यानी ‘राह-वीर’ बनने के लिए जागरूक कर रहा है। लेकिन बुधवार को प्रेमनगर के ठाकुरपुर में सामने आई एक घटना ने विभाग की इस मुहिम और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
 
आरोप है कि हादसे के बाद घायल सड़क पर पड़े रहे और कुछ ही दूरी पर मौजूद परिवहन विभाग की इंटरसेप्टर में तैनात कर्मचारियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की। बताया जा रहा है कि घायल करीब 45 मिनट तक मौके पर रहे। मामले की शिकायत मिलने के बाद आरटीओ प्रवर्तन डॉ. अनीता चमोला ने जांच के आदेश दिए हैं।
 
दो बाइक की आमने-सामने टक्कर
 
जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह करीब 10 बजे ठाकुरपुर क्षेत्र में दो बाइक आपस में टकरा गईं। हादसे में बाइक सवार जयदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। दूसरी बाइक पर सवार दो युवक भी घायल हुए, जो एक निजी कॉलेज के छात्र बताए जा रहे हैं।
 
टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइक क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के बाद मौके पर परिवहन विभाग के कर्मचारी भी पहुंचे।
 
घायल अस्पताल पहुंचाने के बजाय सुलह की सलाह देने का आरोप
 
आरोप है कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने हादसे की स्थिति देखने के बावजूद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की। इसके बजाय दोनों पक्षों को आपस में सुलह कर मामला खत्म करने की सलाह दी गई।इस दौरान घायल सड़क पर ही पड़े रहे। करीब पौन घंटे बाद परिजन मौके पर पहुंचे और घायलों को प्रेमनगर अस्पताल ले गए।मामले की शिकायत आरटीओ प्रवर्तन डॉ. अनीता चमोला से की गई, जिसके बाद पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी गई है।
 
‘गोल्डन आवर’ बचाने की अपील, लेकिन अपने ही अमले पर सवाल
 
परिवहन विभाग की ‘राह-वीर’ योजना का उद्देश्य सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना और उसे गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल या ट्रॉमा केयर सेंटर तक पहुंचाना है।
 
विभाग आम लोगों को भी हादसे के समय घायल की मदद करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे में ठाकुरपुर की घटना को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब विभाग की इंटरसेप्टर मौके के पास मौजूद थी और कर्मचारी भी हादसे से परिचित थे, तो घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता क्यों नहीं दिलाई गई।
 
घायल की जान बचाने वाले को 25 हजार रुपये का पुरस्कार
 
उत्तराखंड परिवहन विभाग की राह-वीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की तत्काल सहायता कर उसे गोल्डन आवर में अस्पताल या ट्रॉमा केयर सेंटर पहुंचाने और उसकी जान बचाने वाले नेक व्यक्ति को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
 
इस पुरस्कार के लिए आवेदन जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से किया जाता है।
 
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
 
फिलहाल ठाकुरपुर की घटना में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि हादसे के बाद मौके पर मौजूद परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने क्या कार्रवाई की और घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने में देरी क्यों हुई।
 
घटना ने परिवहन विभाग की राह-वीर मुहिम के साथ-साथ उसके अपने कर्मचारियों की संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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