जल-जंगल-जमीन पर समझौता नहीं, भूमि घोटालों की जांच कराए सरकार: गोदियाल –

 
कांग्रेस ने सरकारी भूमि हस्तांतरण, लैंड बैंक और कथित भूमि घोटालों पर उठाए सवाल, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करेगी
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य में पिछले दस वर्षों के दौरान हुए भूमि आवंटनों, सरकारी भूमि हस्तांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा विभिन्न कथित भूमि घोटालों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीमित भौगोलिक संसाधनों वाले पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में भूमि और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गोदियाल ने कहा कि हाल के वर्षों में भूमि से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने और अधिकारियों पर कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि भूमि संबंधी मामलों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों में सरकारी और सार्वजनिक महत्व की बहुमूल्य भूमि के नियमों के विपरीत हस्तांतरण तथा निजी हितों के लिए उपयोग किए जाने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र, डाकपत्थर में जल विद्युत निगम की भूमि तथा नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए इनकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से विकसित किए जा रहे “लैंड बैंक” को लेकर भी जनता के बीच आशंकाएं व्याप्त हैं। उनका कहना था कि विभिन्न विभागों की भूमि को एकत्रित कर भविष्य में निजी हितों के लिए उपयोग किए जाने की संभावनाओं को लेकर लोगों में चिंता है।
उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में चरागाह और सामुदायिक भूमि के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। गोदियाल ने कहा कि प्रतापनगर समेत टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और अन्य क्षेत्रों में ग्रामीण समुदाय अपनी पारंपरिक एवं पंचायती भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि पिछले दस वर्षों में हुए सभी प्रमुख भूमि आवंटनों, खरीद-फरोख्त, भूमि हस्तांतरणों और भूमि उपयोग परिवर्तनों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही विभिन्न विभागों की भूमि के हस्तांतरण की समीक्षा के लिए स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए तथा जांच पूरी होने तक विवादित भूमि आवंटनों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
गोदियाल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस शीघ्र ही राज्यपाल से मिलकर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और राज्य के भूमि संसाधनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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