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धराली का वफादार पहरेदार, मलबे के नीचे मालिक की तलाश में रोज आता है ये कुत्ता – Uttarakhand

Dharali's faithful guard, this dog comes everyday in search of its owner under the rubble

Dharali's faithful guard, this dog comes everyday in search of its owner under the rubbleDharali’s faithful guard, this dog comes everyday in search of its owner under the rubbleइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)उत्तरकाशी : उत्तरकाशी के धराली गांव में तबाही को कई दिन हो गए हैं, लेकिन मलबे के बीच एक मूक गवाह रोज लौट आता है. एक भूरे रंग का पहाड़ी कुत्ता. बारिश में भी, धूप में भी, वो उसी जगह आकर बैठ जाता है जहां कभी उसका मालिक रहा करता था. हादसे के वक्‍त यह कुत्‍ता क‍िसी तरह बच गया, लेकिन इसके माल‍िक को अभी भी तलाशा नहीं जा सका है. एनडीआरएफ की टीमें लोगों को मलबे के नीचे से निकालने की कोश‍िश कर रही हैं. लेकिन इस कुत्‍ते की बेचैनी लोगों को रुला रही.गांव के लोग बताते हैं क‍ि हादसे के बाद से यह कुत्‍ता रोज आता है, कभी मलबे को पंजों से खुरचने लगता है, कभी सिर झुकाकर सूंघता है… शायद उसे अब भी उम्मीद है कि मालिक नीचे से निकल आएगा. जिस घर के सामने ये बैठता है, वहां लैंडस्‍लाइड में एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी. कुत्ता न खाने का लोभ देखता है, न किसी के बुलाने पर जाता है. कभी-कभी चुपचाप बैठा रहता है, कभी तेज-तेज रोने जैसा भौंकता है. उसकी आंखों में वो बेचैनी है, जो इंसान भी बयां नहीं कर पाता.बच्‍चों ने नाम रखा शेरूगांव के बच्चों ने उसका नाम शेरू रख दिया है. कोई रोटी डाल देता है, कोई पानी रख देता है, लेकिन शेरू के लिए खाने-पीने से ज्‍यादा जरूरी उस मलबे में खोया इंसान है. धराली में तबाही के निशान मिटने में वक्त लगेगा, लेकिन इस कुत्ते की वफादारी, शायद हमेशा लोगों को याद दिलाती रहेगी कि इंसान चला जाता है लेकिन मोह और प्यार जिंदा रह जाता है.शवों की तलाश अभी भी जारीधराली में आज भी शवों की तलाश जारी है. गढ़वाल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने कहा, 10 वैज्ञान‍िकों की टीम उत्‍तरकाशी पहुंच गई है. यह टीम हर्षिल और धराली में आए मलबे का सर्वे करेगी. अभी तक 43 लोगों की मिसिंग की रिपोर्ट तैयार हुई है. 1378 लोगों को रेस्‍क्‍यू क‍िया गया है. इनमें नेपाल, बिहार, यूपी के साथ उत्तराखंड के लोग और आर्मी के जवान शामिल हैं. झील को पंचर क‍िया गया है ताकि पानी का बोझ कम हो. एनडीआरएफ के मुताबिक, अभी भी लोगों को तलाशने में वक्‍त लगेगा.

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