देहरादून/शिमला ; मानसूनी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के उफान से बाढ़ का संकट गहरा गया है, वहीं पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और मकान ढहने जैसी घटनाओं में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
कानपुर गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं, जहां से 2,95,637 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। 24 घंटे के भीतर यमुना का जलस्तर नैनी में 59 सेंटीमीटर और छतनाग में 57 सेंटीमीटर बढ़ गया है। फाफामऊ में गंगा 80.39 मीटर पर बह रही है, जो प्रयागराज के 84.734 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 4.34 मीटर नीचे है। कानपुर से छोड़े जा रहे इस पानी के कारण प्रयागराज और कौशांबी के कछारी व निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है।
कमरऊ क्षेत्र के बागनाधार स्थित खदान में हुए भूस्खलन में दबे तीनों मजदूरों के शव मलबे से बरामद कर लिए गए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में 167 सड़कें, 222 पेयजल योजनाएं और 130 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं। कालका-शिमला रेललाइन पर मलबा आने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से चार ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि सुजानपुर टीहरा में सर्वाधिक 156.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। 30 जून से 19 अगस्त तक इस मानसून सीजन में राज्य में 205 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल 11,03,326.75 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान आंका गया है।
द्वारीखाल ब्लॉक के महरगांव में भारी बारिश के दौरान पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आकर एक मकान ढह गया। इस दर्दनाक हादसे में एक दो वर्षीय बच्चे (रुद्रांश), एक वृद्धा (मथुरा देवी) और एक पुरुष (धीरेंद्र सिंह) की मलबे में दबने से जान चली गई। एसडीआरएफ और प्रशासन की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक महिला (विदेश्वरी देवी) को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जिला प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये और क्षतिग्रस्त मकान के लिए दो लाख रुपये की फौरी सहायता प्रदान की गई है।
लोक निर्माण विभाग, सीआरएसटी इंटर कॉलेज, के०एल० साह ट्रस्ट नगर पालिका परिषद बा0 इ0का0 का…
पीड़ित महिला को किसी भी समस्या के समाधान व न्याय हेतु आयोग सदैव उनके साथ;…
122 पदों पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद खेल मंत्री ने दी जानकारी देहरादून। उत्तराखंड…
बीएलओ अनावश्यक दस्तावेज न मांगें, प्रत्येक सुनवाई का तत्काल बीएलओ एप और ईआरओ नेट पर…
अभिलेख नहीं मिलने पर भगवानपुर स्थित लीसा डिपो में रखे विरोजा और तारपीन तेल का…
आउटडेटेड बसों में रेट्रोफिट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर, प्रदेश में चार्जिंग स्टेशन विकसित करने…