
देहरादून। चारधाम यात्रा मार्गों, प्रमुख ट्रैकिंग स्थलों और राज्य के महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्रों पर पंचकर्म थेरेपी और योग चिकित्सा सेवाएं शुरू करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस पहल के तहत भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड की ओर से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। जिसमें परिषद में पंजीकृत एवं प्रशिक्षित युवाओं को इन स्थलों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए विशेष अनुमति देने का आग्रह किया जाएगा।
भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष डा. जेएन नौटियाल ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य चारधाम यात्रा और पर्यटन स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं देश-विदेश के पर्यटकों को सुरक्षित, प्राकृतिक और आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष बड़ी संख्या में यात्री ऊंचाई वाले क्षेत्रों, कठिन ट्रैकिंग मार्गों और लंबे सफर के कारण शारीरिक थकान, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों की समस्या, तनाव और ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे में पंचकर्म थेरेपी और योग चिकित्सा प्रभावी और सहायक सिद्ध हो सकती हैं।
डा. नौटियाल ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड में पंजीकृत व प्रशिक्षित युवाओं को ही पंचकर्म एवं योग चिकित्सा सेवाएं देने की अनुमति दी जाए। इससे उपचार की गुणवत्ता, सेवाओं की विश्वसनीयता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित या अप्रमाणित सेवाओं पर रोक लगाने के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है।
रजिस्ट्रार नर्वदा गुसाईं के अनुसार इस पहल से आयुष पद्धतियों को संगठित और नियंत्रित रूप में पर्यटन से जोड़ा जा सकेगा। इससे न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि आयुष क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है। कहा कि चारधाम यात्रा मार्गों और पर्यटन स्थलों पर पंचकर्म एवं योग चिकित्सा सेवाएं शुरू करने के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद इस योजना को शीघ्र धरातल पर उतारा जा सकेगा।
