त्रिजुगीनारायण एक आस्था का मंदिर

त्रिजुगीनारायण एक आस्था का मंदिर जहां पर सभी राज्यों से युवक लोग यहां पर आ रहे हैं और इस मंदिर की उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त करके शादी के जोड़े यहां पर विवाह करके अपना खुशहाल जीवन की कामना करते हैं।
 
त्रिजुगीनारायण मंदिर की आस्था को देखकर पर्यटकों का मन जिस प्रकार से यहां की ओर खिंचा जा रहा है उसी प्रकार से यहां की कुव्यवस्था के परिणाम भी यहां आकर ही देखने को मिलते हैंं।
 
यहां की व्यवस्था वैसे तो केदारनाथ बोर्ड के अधीन है लेकिन व्यवस्था के नाम पर ना ही के बराबर है यहां की ग्राम प्रधान प्रियंका तिवारी जी हैं जो कि एक उत्तराखण्ड की एक जानी-मानी ब्लागर हैं और अत्यधिक व्यस्त होने के कारण अत्यधिक व्यस्त रहती है और जिस कारण क्षेत्र के निवासी अत्यंत नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं त्रिजुगीनारायण मंदिर के सचिव सूर्य प्रसाद सेमवाल, अध्यक्ष सच्चिदानन्द पंचपुरी, भंग दर्शन सेमवाल, अनिरुद्ध सेमवाल, रामप्रसाद सेमवाल, शांति प्रसाद सेमवाल एवं गोविन्दराम घिल्डियाल की मौजूदगी में यहां की पूर्व व्यवस्था ग्राम प्रधान प्रियंका तिवारी यहां का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखती और न ही किसी कार्य में शामिल होती हैं और जब शामिल होती है जब यहां पर बड़े बड़े अधिकारी जैसे विधायक, सांसद, जिलाधिकारी एवं उत्तराखण्ड के चीफ मिनिस्टर के आगमन का समय होता है मात्र तब ही यहां पर दर्शन देती है अन्यथा अपना केमेरा ले अपनी विडियो एवं अपने होटल व्यवसाय में अधिक व्यवस्थित रहती है और क्षेत्र के लोंगों जानकारी मिली तो पता चला कि श्री मती प्रियंका तिवारी त्रिजुगीनारायण ग्राम सभा से निर्विरोध प्रधान चुनी गईं थीं लेकिन यहां के निवासियों से बातचीत करने पर पता चला कि ये लोग प्रधान बनी प्रियंका तिवारी को पसंद ही नहीं करते हैं जबकि प्रियंका तिवारी से बातचीत पर पता चला कि यहां के निवासी उसकी सुनते ही नहीं है और उन्होंने अपनी जमीन अस्पताल के बनाने के लिए दे रखी है जबकि कोई भी व्यक्ति सुलभ शौचालय के लिए कोई जमीन देने को तैयार ही नहीं है और न ही कोई कार्य करने को तैयार है।
 
मंदिर की व्यवस्था के बारे में बताएं तो मंदिर के अंदर काफी गंदगी मौजूद थी पानी के कुंड के अंदर का पानी भी बहुत गंदा मिला जबकि श्रद्धालु यहां से गंगा जल लेकर जाते हैं जो कि अत्यधिक मात्रा में गंदा देखने को मिला। मंदिर में तीन स्थानों पर विवाह के लिए फेरे लेने के लिए स्थान बनायें गए हैं और उनकी सजावट के लिए जो फूल लगे हुए हैं पता नहीं कितने महिनों से लगे हुए हैं कोई नियम नहीं है वैसे तो मंदिर बोर्ड यहां पर शादी करने के ₹30,000/- हर जोड़े से प्राप्त करते हैं लेकिन एक पूजा के हर सामान भी विवाहित जोड़े से ही प्राप्त करता है और यही पर सीजन में प्रतिदिन 5 शादियों से लेकर 30 शादियां प्रति दिन होती है तो उस हिसाब से यहां की व्यवस्था उस प्रकार कहीं खरी नहीं उतरती हैं क्योंकि यहां पर ना तो कहीं पर पानी पीने की व्यवस्था और न ही कोई सुलभ शौचालय हैं जिससे यहां बहुत ही कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
 
यहां पर अधिकतर विभिन्न राज्यों से लोगों का आने का तांता लगा रहता है, रास्तों की भी दशा भी काफी दयनीय है क्योंकि सोनप्रयाग से त्रिजुगीनारायण मंदिर तक सड़क व्यवस्था भी ठीक से नहीं है इसलिए यहां की व्यवस्था पूर्ण रूप से व्यवस्थित न होने के कारण पर्यटक यहां से निराश होकर ही जाते हैं।
 
त्रिजुगीनारायण मंदिर उत्तराखण्ड एक पवित्र एवं मर्यादित मंदिर है कहा जाता है कि इस मंदिर में ही भगवान शिव जी एवं पार्वती जी ने विवाह के फेरे लेकर अपना विवाह संपन्न किया था इसलिए इस मंदिर की प्रतिष्ठा दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है और वैवाहिक दिनों में यहां होटल से लेकर टेक्सियों की अत्यधिक भीड़ का सामना करना पड़ता है क्योंकि यहां पर किसी प्रकार की व्यवस्था ही नहीं है अत्यधिक भीड़ के कारण और पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण अत्यधिक जाम लगा रहता है।

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