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तुमड़िया डैम खतरे के निशान पर, भविष्य सुरक्षित करने को 174 करोड़ की बड़ी पहल – पर्वतजन

रामनगर। कुमाऊं क्षेत्र के अहम जलस्रोत तुमड़िया डैम को लेकर सिंचाई विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। समय के साथ डैम में लगातार जमा हो रही गाद और कुछ स्थानों पर कमजोर होती संरचना ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए डैम के दीर्घकालीन संरक्षण और सुरक्षा के लिए करीब 174 करोड़ रुपये की एक व्यापक सुधार योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसे जल्द ही शासन की मंजूरी मिलने की संभावना है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने बताया कि हाल ही में तुमड़िया डैम का विभागीय स्तर पर विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्षों से जमा हो रही गाद के कारण डैम की जल भंडारण क्षमता लगातार घट रही है। इसके साथ ही बांध की संरचना में भी कुछ संवेदनशील और कमजोर हिस्सों की पहचान की गई है, जिनका समय रहते उपचार किया जाना जरूरी है।
मुख्य अभियंता के अनुसार, जब जलाशय को पूरी क्षमता के साथ भरा जाता है, तब डैम के निचले हिस्से में स्थित पीआरडब्ल्यू (PRW) संरचनाओं में तकनीकी समस्याएं उभर कर सामने आती हैं। पानी के अधिक दबाव को नियंत्रित करना, पाइपिंग जैसी संभावित खतरनाक स्थितियों को रोकना और बांध की मजबूती बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि इन पहलुओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में गंभीर तकनीकी संकट उत्पन्न हो सकता है।

इन्हीं जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग ने एक विस्तृत एस्टीमेट तैयार किया है। प्रस्तावित योजना में डैम के कमजोर हिस्सों का सुदृढ़ीकरण, आवश्यक तकनीकी सुधार कार्य और बड़े स्तर पर गाद निकासी को प्राथमिकता दी गई है। इस योजना के लागू होने से न केवल डैम की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि इसकी जलधारण क्षमता को भी फिर से मजबूत किया जा सकेगा।
संजय शुक्ल ने बताया कि लगभग 174 करोड़ रुपये की यह परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अंतिम निरीक्षण के बाद प्रस्ताव को शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति मिलते ही इस अहम परियोजना पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि योजना के पूर्ण होने के बाद तुमड़िया डैम की सुरक्षा, क्षमता और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे सिंचाई व्यवस्था, जल प्रबंधन और आसपास के क्षेत्रों की दीर्घकालीन जरूरतों को मजबूती मिलेगी।

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