गैरसैंण। उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस दृष्टि से चुनावी साल में सत्तापक्ष और विपक्ष के मध्य जोरआजमाइश प्रारंभ हो गई है, जो ग्रीष्मकालीन राजधानी गैंरसैण में सोमवार से प्रारंभ होने वाले बजट सत्र में भी दिखने के आसार हैं। इसके लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने ही अपने-अपने तरकश में तीर तैयार किए हैं।
रविवार देर शाम विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की अध्यक्षता में हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सत्र के लिए दो दिन का एजेंडा तय किया गया। चूंकि, यह इस साल का पहला सत्र है तो इसकी शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। तय एजेंडे के अनुसार सोमवार को सुबह 11 बजे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) का अभिभाषण होगा और अपराह्न तीन बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करेंगे।
बजट का आकार 1.10 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने की संभावना है। राज्य के संसदीय इतिहास में यह पहला मौका है, जब सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होने के साथ ही बजट भी पेश होगा। सत्र के दौरान 10 मार्च को सरकार की ओर से नौ विधेयक पेश किए जाएंगे। वहीं, 38 विधायकों ने सत्र के लिए 600 प्रश्न लगाए हैं।
विधानसभा सचिवालय की ओर से भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में बजट सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने भराड़ीसैंण पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। देर शाम सर्वदलीय बैठक के बाद उन्होंने विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में सत्र के लिए दो दिन के एजेंडे पर मुहर लगाई गई। सोमवार को दोपहर दो बजे विधानसभा अध्यक्ष सदन में राज्यपाल के अभिभाषण का वाचन करेंगी और इसके साथ ही सत्र की औपचारिक शुरुआत होगी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष ने सर्वदलीय बैठक में सदन के सुचारू संचालन में सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा की। बैठकों में संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल, भाजपा विधायक खजानदास व उमेश शर्मा काऊ व बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद उपस्थित रहे।
वित्त मंत्री के रूप में धामी का पहला बजट
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट पेश करेंगे। इससे पहले पिछले वर्ष उन्हाेंने अनुपूरक बजट पेश किया था। बता दें कि पिछले वर्ष तत्कालीन वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद वित्त मंत्रालय का दायित्व मुख्यमंत्री धामी ही देख रहे हैं।
विपक्ष कांग्रेस ने बनाए रखी दूरी
विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक से मुख्य विपक्ष कांग्रेस ने इस बार भी दूरी बनाए रखी। यही नहीं, सर्वदलीय बैठक में भी कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। असल में पिछले वर्ष गैरसैंण में हुए विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस के दोनों सदस्यों नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य व विधायक प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संख्या बल के आधार पर एजेंडा तय कर रही है। ऐसे में विपक्ष का कार्यमंत्रणा समिति में जाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
सत्तापक्ष और विपक्ष ने बनाई अपनी-अपनी रणनीति
सत्र के लिए सत्तापक्ष ने विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों का जवाब देने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की मौजूदगी में हुई भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में मंत्रियों व विधायकों को तथ्यों व तर्कों के साथ विपक्ष के हमलों का जवाब देने के दृष्टिगत पूरी तैयारी से सदन में आने के निर्देश दिए गए। उधर, कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक में बेरोजगारी, पलायन, कानून व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत तमाम मुद्दों को लेकर सरकार को सड़क से सदन तक घेरने की रणनीति बनाई गई।
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