
सरकार की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में राज्य की स्टार्टअप नीति को युवाओं को ध्यान में रखते हुए आगे लेकर जाने का रोडमैप तैयार किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से निकटता, प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने का लाभ लिया जाएगा। साथ ही अनन्य जलवायु परिस्थितियों के साथ, उत्तराखंड को खाद्य और कृषि, यात्रा और पर्यटन, शिक्षा, फार्मास्युटिकल, वेलनेस, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, ड्रोन, रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप के लिए सामरिक हब के रूप में स्थापित करने की योजना है।
उद्योग- शिक्षा संस्थानों का लिया जाएगा सहयोगमजबूत बुनियादी ढांचा व राज्य को देश में स्टार्टअप के लिए सर्वाधिक उपयुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रख्यापित सरकारी उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग और समन्वय को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि नवाचारों को व्यवसायिक रूप दिया जा सके। साथ ही प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों का विस्तार हो सके। सरकार स्टार्टअप उद्यमों के विकास के लिए पूंजी, आवश्यक बुनियादी ढांचे और अन्य संसाधनों को जुटाने में मदद करेगी।
स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देगी सरकारअभी तक राज्य में 1750 पंजीकृत स्टार्टअप हैं। सरकार का मानना है कि अनुकूल नीतियों और प्रोत्साहन के माध्यम से प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और उत्तराखंड को देश के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
स्टार्टअप नीति में इस प्रकार मिलेगा प्रोत्साहनसरकार नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी, नई कार्यविधि या प्रक्रियाओं, पर्यावरण के अनुकूल तकनीक से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहित करेगी।
ऐसे स्टार्टअप जो जटिल समस्याओं के समाधान के साथ रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे, उन्हें मिलेगी प्राथमिकता।छात्र और महिला उद्यमियों के लिए मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि महिला उद्यमियों की संख्या बढ़े।
स्टार्टअप के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
योजना के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा।पूरे प्रदेश में 30 नये इंक्यूबेशन सेंटर विकसित करने की योजना पर किया जाएगा कार्य।
