इस बार वीकेंड उत्तराखंड के लिए कुछ ज्यादा ही भारी पड़ा. दिल्ली, मेरठ, लखनऊ और आगरा जैसे शहरों में 44-45 डिग्री की तपती गर्मी से परेशान लोग जब शनिवार की सुबह पहाड़ों की तरफ निकले, तो मसूरी, नैनीताल और जोशीमठ की सड़कें उन्हें संभाल नहीं पाईं. नतीजा सामने था घंटों का लंबा जाम, होटलों के बाहर “हाउसफुल” के बोर्ड और सड़कों पर खड़े हजारों वाहनों की कतार थी.
हालात सबसे ज्यादा खराब जोशीमठ इलाके में रहे. विष्णुप्रयाग से शुरू होकर करीब 15 किलोमीटर आगे तक वाहनों की ऐसी कतार लगी कि सड़क किसी पार्किंग से कम नहीं लग रही थी. जाम की कुल लंबाई 25 से 30 किलोमीटर तक जा पहुंची. जो लोग बदरीनाथ दर्शन के लिए निकले थे, वे घंटों इंजन बंद करके गाड़ियों में बैठे रहे. छोटे बच्चों वाले परिवार सबसे ज्यादा परेशान नजर आए न आगे बढ़ने की जगह, न पीछे लौटने का रास्ता.
मसूरी-लाइब्रेरी बाजार में पैर रखना मुश्किलमसूरी में जेपी बैंड से लेकर कैंपटी रोड के जीरो प्वाइंट तक करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा. लाइब्रेरी बाजार में हालत यह थी कि पैदल चलना भी दूभर हो गया. मोतीलाल नेहरू मार्ग और हरनाम सिंह मार्ग पर भी गाड़ियाँ रेंगती रहीं. सबसे अजीब बात यह रही कि इस जाम की मार स्कूली बच्चों पर भी पड़ी कई बच्चे देरी से स्कूल पहुंचे, और अभिभावक जाम में फंसकर कुछ नहीं कर सके.
नैनीताल- होटल फुल, झील किनारे जगह नहींनैनीताल में माल रोड पर चलना किसी मेले से कम नहीं था. नैनी झील, स्नो व्यू और टिफिन टॉप हर जगह पर्यटकों की भीड़. कैंचीधाम में भी श्रद्धालुओं का ऐसा रेला उमड़ा कि मंदिर परिसर और आसपास की सड़कें खचाखच भर गईं. होटल और होमस्टे मालिकों के लिए यह वीकेंड बढ़िया रहा अधिकतर बुकिंग पहले से फुल थीं. जो पर्यटक बिना बुकिंग के पहुंचे, उन्हें निराशा हाथ लगी.
देहरादून भी जाम की चपेट मेंराजधानी देहरादून खुद भी इस भीड़ से अछूती नहीं रही. सहारनपुर रोड, राजपुर रोड, सहस्रधारा रोड और मसूरी मार्ग सभी जगह वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं. पहाड़ों की तरफ जाने वाले पर्यटकों और रोजमर्रा के स्थानीय ट्रैफिक के टकराव ने शहर की रफ्तार थाम दी. हालांकि, इस सबके बीच एक अच्छी खबर यह रही कि गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा मार्गों पर यातायात सामान्य रहा. प्रशासन ने सभी प्रमुख यात्रा रूट खुले रखे और श्रद्धालुओं से मौसम की जानकारी लेकर चलने की अपील की.
प्रशासन का ‘प्लान-ए’ और ‘प्लान-बी’देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन मिलकर ट्रैफिक डायवर्जन चला रहे हैं. चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव ऋषिकेश इस वक्त प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, जहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. डीएम ने खुद मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अफसरों को जरूरी निर्देश दिए.
आखिर इतनी भीड़ क्यों?इसका जवाब सीधा है मैदानों में असहनीय गर्मी, शनिवार-रविवार की छुट्टी, स्कूलों की गर्मी की छुट्टियाँ शुरू होने की तैयारी और चारधाम यात्रा का चरम सब कुछ एक साथ आ गया. पहाड़ हमेशा से गर्मियों में राहत की जगह रहे हैं, लेकिन जब लाखों लोग एक साथ उसी राहत की तलाश में निकलें, तो रास्ते संकरे पड़ जाते हैं.
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