देहरादून, 4 अक्टूबर 2025 —उत्तराखंड की बीज एवं जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण एजेंसी (USOCA) एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है।कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने एजेंसी की प्रमाणन प्रणाली में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और अनियमितताएं पाए जाने पर ₹10 लाख का आर्थिक दंड लगाया है, साथ ही एजेंसी के संचालन क्षेत्र को केवल उत्तराखंड राज्य तक सीमित कर दिया है।
ऑडिट में खुलासा – मृत किसानों के नाम पर जारी हुआ ऑर्गेनिक प्रमाणन
APEDA की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से अगस्त 2025 के बीच 48 ग्रोवर समूहों पर किए गए आकस्मिक ऑडिट में USOCA की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां सामने आईं।जांच में यह पाया गया कि –
कई ICS (Internal Control System) कार्यालय वास्तविक पते पर मौजूद ही नहीं थे।
मृत किसानों के नाम ऑर्गेनिक प्रमाणन सूची में दर्ज पाए गए।
कई किसानों ने रासायनिक खाद और बीटी कॉटन का उपयोग किया, फिर भी उन्हें ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट जारी किया गया।
कई गांवों में कपास की खेती ही नहीं थी, फिर भी वहां से प्रमाणन जारी किया गया।
सबसे गंभीर मामला यह कि ट्रांजैक्शन सर्टिफिकेट (TCs) फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी हुए सर्टिफिकेट
जांच में सामने आया कि कुछ कंपनियों को गलत तरीके से ऑर्गेनिक प्रमाणन जारी किया गया।एक मामले में M/s Aadroit Indulgence Pvt. Ltd. को जारी किए गए TCs के दस्तावेज फर्जी पाए गए।यह भी पाया गया कि USOCA ने फरवरी 2025 में जारी APEDA के निर्देशों का पालन नहीं किया और 48 में से केवल 14 ग्रोवर समूहों को ही रद्द किया, बाकी समूहों को चालू रखा गया, जिनमें से कई नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।
5 बार जारी हुआ शो-कॉज़ नोटिस
APEDA ने 29 जुलाई, 31 जुलाई, 14 अगस्त, 29 अगस्त और 3 सितंबर 2025 को USOCA को पांच बार शो कॉज़ नोटिस जारी किया।इसके बाद 10 सितंबर 2025 को दिल्ली में राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NAB) की उप-समिति के समक्ष सुनवाई हुई।सुनवाई के दौरान USOCA के निदेशक दिनेश कुमार और जॉइंट डायरेक्टर डॉ. जे.एस. नयाल उपस्थित हुए।उन्होंने स्वीकार किया कि ट्रांजैक्शन सर्टिफिकेट जारी करने से पहले उचित जांच नहीं की गई थी।
NAB समिति की टिप्पणी — NPOP मानकों का पालन नहीं
राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NAB) की समिति ने माना कि USOCA ने राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के मानकों का पालन नहीं किया।साथ ही, पहले जारी आदेश (23 अप्रैल 2025) — जिसमें एजेंसी को केवल उत्तराखंड तक सीमित रखने का निर्देश दिया गया था — का भी USOCA ने पालन नहीं किया।समिति ने कहा कि “एजेंसी द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदम सिर्फ दबाव में उठाए गए रक्षात्मक कदम हैं, न कि वास्तविक सुधार।”
APEDA का आदेश – जुर्माना और संचालन पर प्रतिबंध
APEDA ने 1 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट कहा:
USOCA पर ₹10 लाख का आर्थिक दंड लगाया जाए।
एजेंसी का संचालन क्षेत्र केवल उत्तराखंड राज्य तक सीमित रहे।
ऑपरेटरों के ट्रांसफर से संबंधित सभी छूट तत्काल प्रभाव से रद्द की जाएं।
यह आदेश APEDA की जनरल मैनेजर विनीता सुधांशु के हस्ताक्षर से जारी किया गया। एजेंसी को “तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने” के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या है USOCA?
Uttarakhand State Organic Certification Agency (USOCA) राज्य सरकार के अधीन एक प्रमाणन निकाय है, जो किसानों, समूहों और कंपनियों को ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए प्रमाणन जारी करता है।यह एजेंसी 2016 से NPOP के तहत मान्यता प्राप्त है और फसलों, पशुपालन, प्रसंस्करण, समुद्री पौधों और ग्रीनहाउस उत्पादन के लिए प्रमाणन जारी करती रही है।
राज्य सरकार पर बढ़ा दबाव
इस कार्रवाई के बाद राज्य सरकार पर USOCA की कार्यप्रणाली की आंतरिक जांच कराने का दबाव बढ़ गया है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस घोटाले ने उत्तराखंड की “ऑर्गेनिक स्टेट” पहचान को गहरा झटका दिया है।क्योंकि राज्य वर्षों से खुद को “ऑर्गेनिक हब ऑफ इंडिया” के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।
सर्टिफिकेट के नाम पर कथित घोटाला – ₹1-2 लाख तक की डीलिंग
सूत्रों के अनुसार, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर ₹1 से ₹2 लाख तक लिए जाते थे।कई शिकायतें यह भी सामने आई हैं कि बिना निरीक्षण और फील्ड विजिट के सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे।
मांग – एजेंसी को बंद किया जाए, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
कृषि क्षेत्र के जानकारों और किसानों ने मांग की है कि राज्य सरकार तुरंत USOCA को निलंबित करे और सभी उच्च अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।सुझाव दिया गया है कि एजेंसी की कमान ऐसे अधिकारी को दी जाए, जिसे ऑर्गेनिक क्षेत्र में लंबे समय का अनुभव हो।
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड में कृषि, उद्यान, ऑर्गेनिक बोर्ड और USOCA — सभी विभागों पर विवादों का साया मंडरा रहा है।लोगों का मानना है कि अब समय आ गया है जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि राज्य की साख बची रहे।
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