Uttarakhand News: दून के इस हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने बिना बड़ा चीरा लगाए सीने से निकाला फुटबॉल जितना ट्यूमर – पर्वतजन

VATS तकनीक से डॉक्टरों ने रचा नया कीर्तिमान, मरीज हुआ पूरी तरह स्वस्थ

देहरादून। श्री महंत इंद्रेश अस्पताल (SMIH), देहरादून के डॉक्टरों ने चिकित्सा इतिहास में एक बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल के कैंसर विभाग की टीम ने एक युवा मरीज के सीने से फुटबॉल के आकार का विशाल ट्यूमर (करीब 1.5 किलो वजनी) बिना बड़ा चीरा लगाए सफलतापूर्वक हटा दिया।
यह जटिल सर्जरी वीडियो-असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक से की गई, जिसे कैंसर सर्जन डॉ. कनिका कपूर ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
एंडोस्कोपिक तकनीक से बिना दर्द और तेज़ रिकवरी
इस सर्जरी में पारंपरिक ओपन सर्जरी की तरह बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसके बजाय की-होल यानी छोटे छिद्रों के माध्यम से ट्यूमर को निकाला गया।

डॉ. कनिका कपूर ने बताया —

“VATS तकनीक से मरीज को कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव और बेहद तेज़ रिकवरी का लाभ मिलता है। यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित और आरामदायक विकल्प है।”

उत्तराखंड में विश्वस्तरीय कैंसर उपचार अब SMIH में संभव — डॉ. पंकज गर्ग
कैंसर विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि अब श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में सामान्य से लेकर अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव कैंसर सर्जरी तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।उन्होंने कहा —

“हमारा उद्देश्य उत्तराखंड के मरीजों को दिल्ली या अन्य महानगरों की तरह विश्वस्तरीय कैंसर उपचार यहीं उपलब्ध कराना है।”

मरीज कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटा
इस जटिल सर्जरी के बावजूद मरीज को न तो बड़ा दर्द हुआ और न ही लंबे समय तक अस्पताल में रुकना पड़ा। डॉक्टरों की टीम के अनुसार, मरीज कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया।
अस्पताल परिवार ने महाराज जी का जताया आभार
अस्पताल प्रशासन ने महाराज जी के निरंतर आशीर्वाद और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।अस्पताल परिवार ने कहा कि उनके सहयोग से श्री महंत इंद्रेश अस्पताल उत्तराखंड में कैंसर उपचार के नए मानक स्थापित कर रहा है।
यह उपलब्धि क्यों खास है?

यह सर्जरी फुटबॉल के आकार के ट्यूमर पर की गई।
VATS (Video-Assisted Thoracoscopic Surgery) तकनीक से बिना बड़ा चीरा लगाए ऑपरेशन संभव हुआ।
मिनिमली इनवेसिव तकनीक से मरीज की रिकवरी बेहद तेज़ रही।
उत्तराखंड में ऐसी उन्नत सर्जरी बहुत कम अस्पतालों में संभव है।

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