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उत्तराखंड एसटीएफ ने 25 सालों से फरार बदमाश सुरेश शर्मा को किया गिरफ्तार, 2 लाख का था इनाम – Uttarakhand

Uttarakhand STF arrested Suresh Sharma, a criminal who was absconding for 25 years, he had a reward of Rs 2 lakh on his headइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)Uttarakhand News: उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 25 वर्षों से फरार चल रहे हत्या के आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. आरोपी पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस ने हत्या के इनामी आरोपी सुरेश शर्मा को झारखंड के जमशेदपुर से गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी एसटीएफ की स्मार्ट पुलिसिंग का नतीजा है, जिसमें तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया.सुरेश शर्मा 1999 में तीर्थनगरी बद्रीनाथ में तत्कालीन डीजीसी (क्रिमिनल) बालकृष्ण भट्ट की सरेआम हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुआ था. घटना के समय सुरेश ने भूमि विवाद के चलते चाकू से वार कर बालकृष्ण भट्ट की हत्या कर दी थी. हालांकि कुछ समय बाद उसे जमानत मिल गई, लेकिन उच्चतम न्यायालय द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद वह फरार हो गया. एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया. पुलिस उपाधीक्षक आर.बी. चमोला की निकट पर्यवेक्षण में इस टीम ने आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कड़ी मेहनत की.तकनीकी और भौतिक विश्लेषण का योगदानएसटीएफ ने 24 वर्षों पुराने फिंगरप्रिंट, आवाज़ के नमूने और अन्य दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किया. टीम ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और झारखंड में संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखी. सुरेश शर्मा की पहचान स्थापित करने के लिए डिजिटल सॉफ्टवेयर और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. आखिरकार जमशेदपुर में मनीश शर्मा और फिर मनोज जोशी के नाम से पहचान छुपाए हुए पाया गया. उसके आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट का मिलान करते हुए टीम ने 23 जनवरी को उसकी गिरफ्तारी की.पूछताछ में सुरेश शर्मा ने स्वीकार किया कि वह जमानत खारिज होने के बाद कोलकाता चला गया, जहां उसने ठेली लगाकर खाना बनाने और बाद में कपड़े के व्यापार से अपनी पहचान छुपाई. लॉकडाउन के बाद उसने मेटल ट्रेडिंग कंपनी शुरू की और भारत के अलग-अलग शहरों में भ्रमण करता रहा. उसने बताया कि वर्तमान में उसकी पत्नी और दो बच्चे पश्चिम बंगाल में रहते हैं. पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने राज्य में लंबे समय से फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के विशेष निर्देश दिए थे. इसके बाद एसटीएफ ने इस चुनौतीपूर्ण टास्क को अंजाम दिया.एसटीएफ की कार्रवाई ने अपराधियों को दिया कड़ा संदेशएसटीएफ की इस सफलता ने न केवल उत्तराखंड पुलिस की कार्यकुशलता को साबित किया है, बल्कि संगठित अपराधियों के खिलाफ उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर किया है. 25 सालों से फरार इस शातिर अपराधी की गिरफ्तारी से जनता में सुरक्षा और न्याय के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है. एसटीएफ की यह उपलब्धि उत्तराखंड पुलिस के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है. यह कार्रवाई दर्शाती है कि पुलिस, चाहे जितना भी समय बीत जाए, अपराधियों को कानून के दायरे में लाने के अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटती.

Nandni sharma

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