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किच्छा: काफी समय पहले लोग न तो उम्र देखते थे और न ही बच्चों की मासूमियत… दोनों की बचपन में ही शादी कर देते थे. मगर जब आज 21वीं सदी की बात करें तो कभी-कभी लगता है कि आज भी कुछ नहीं बदला है. लोगों की वही छोटी सोच है. बेटियां उन्हें आज भी बोझ लग रही हैं. जहां एक तरफ बेटी आज आसमान से लेकर जमीन तक पर मिसाल पेश कर रही हैं. वहीं इस आधुनिक युग में नाबालिग लड़कियों की शादी करने का सिलसिला थम नहीं रहा है.अगर इसके पीछे के कारण की बात करें तो शिक्षा का अभाव है. कुछ ऐसा ही मामला उत्तराखंड से सामने आया है. यहां के किच्छा की 15 साल की बच्ची का उसके करीब दोगुना उम्र के लड़के के साथ शादी करवाई जा रही थी. अचानक पुलिस गेस्ट बनकर पहुंची और घूंघट उठाया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. इसके बाद पूरा माजरा साफ-साफ हो गया.
एक घर में धूमधाम से शादी की तैयारियां चल रही थीं. तभी सोमवार रात को स्वयंसेवी संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट (आईएसडी) को सूचना मिली कि गांव अंजनिया में एक बच्ची की शादी हो रही है. उन्होंने सोचा क्यों न जाकर देखा जाए. इस पर आईएसडी परियोजना निदेशक बिन्दुवासिनी पुलिस को लेकर मौके पर पहुंचीं. वहां शहनाइयां बज रही थी. मासूम बच्ची को हरियाणा के 27 साल के युवक से शादी के बंधन में बांधा जा रहा था.
जब पुलिस और एनजीओ की टीम ने बच्ची का आधार कार्ड मांगा तो घरवाले दिखा नहीं पाए. वे आनाकानी करने लगे, लेकिन स्कूल के रिकॉर्ड्स ने सारा सच उगल दिया. जूनियर हाईस्कूल के दस्तावेजों में किशोरी की उम्र 15 वर्ष 11 महीने पाई गई. प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बारात को वापस लौटा दिया और किशोरी को सुरक्षित कस्टडी में ले लिया.
आईएसडी के अध्यक्ष डॉ अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नाबालिग को वन स्टॉप सेंटर में दाखिल कराया गया है. दोनों पक्षों के परिजनों को काउंसलिंग के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया है. निदेशक बिंदुवासिनी ने बताया कि विवाह की तैयारी पूरे धूमधाम से की गई थी. पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी कराई गई है. मौके पर मौजूद बैंड बाजा और कैटरर को वैवाहिक कार्य के कांट्रेक्ट से पहले दूल्हा और दुल्हन के बालिग होने की जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं.