देहरादून: रुड़की में लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी चल रहे विष संग्रहण सेंटर से पुलिस ने 86 जहरीले सांप बरामद किए हैं। इस वेनम सेंटर से जहर की सप्लाई होती थी। हालांकि छापे के दौरान केंद्र में किसी भी तरह का वेनम नहीं पाया गया। हरिद्वार जिले के रुड़की में अवैध रूप से चल रहे वेनम सेटर की सूचना पर छापेमारी से शहर में हड़कंप मच गया। दिल्ली से आई पीपल्स फॉर एनिमल की टीम स्थानीय वन विभाग के साथ वेनम सेंटर पर छापेमारी की। रुड़की के सिविल लाइन कोतवाली क्षेत्र के खंजरपुर गांव में जंगल में वेनम सेंटर चलने के लिए सूचना के बाद यह छापेमारी की गई।
टीम को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित सांपों को अपने कब्जे में रखे होने की जानकारी मिली थी। इस संबंध में रुड़की वन विभाग एसडीओ सुनील बलूनी ने बताया कि उन्हें वेनम सेंटर में प्रतिबंधित प्रजाति के सांप रखे होने की सूचना मिली थी। मौके पर टीम को दो जहरीले प्रजाति के 86 सांप बरामद हुए हैं, जिसमे कोबरा और रसेल वाइपर सांप शामिल हैं। हालांकि केंद्र में किसी भी प्रकार का जहर नहीं मिला है। इन सभी सांपों को वन विभाग में अपनी अभिरक्षा में ले लिया है। मौके पर केंद्र का मालिक नहीं मिला।
2023 में खत्म हो चुका है लाइसेंसएसडीओ बलूनी ने बताया कि वन विभाग इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि विष संग्रहण सेंटर के संचालक नितिन कुमार को पूर्व में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड देहरादून ने 31 दिसंबर 2022 को प्राण रक्षक औषधीय के विनिर्माण के लिए सर्प विष संग्रहण केंद्र ग्राम किशनपुर, ज्वालापुर, हरिद्वार में स्थापना के लिए 1 साल की सशर्त अनुमति दी थी।
इस केंद्र का लाइसेंस 2023 दिसंबर में खत्म हो चुका है। वर्तमान में वेनम सेंटर के मालिक के पास सर्प संग्रहण या विष संग्रहण केंद्र की कोई वैध अनुमति नहीं है। इस छापेमारी के दौरान केंद्र में 70 कोबरा और 16 रसेल वाइपर पाए गए। एसडीओ बलूनी ने बताया कि बरामद किए गए सांप भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (यथा संशोधित 2022) की अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति घोषित है। वन विभाग की टीम ने सभी सांपों को अभिरक्षा में ले लिया है।
रुड़की में विष की तस्करीदिल्ली के पीएफए टीम के सदस्य गौरव गुप्ता का कहना है कि उनकी टीम को रुड़की में विष की तस्करी करने की सूचना मिली थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि यह सभी तस्कर रेव पार्टी जैसे आयोजनों के लिए जहर सप्लाई करते थे। सेंटर का की परमिशन खत्म होने के बाद भी इस लाइसेंस को दिखा कर यहां सांप लाये जा रहे थे और सांपों की विष ग्रंथि निकालने के बाद जब सांप मर जाता था तो उसे यही खेतों में दबा देते थे। पीएफए की टीम ने यह भी सवाल उठाया है कि जब दिल्ली में उनकी टीम को इस बारे में पता चला तो फिर स्थानीय वाइल्ड लाइफ को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी।
इस पूरे मामले के खुलासे के बाद वन विभाग पर भी उंगली उठ रही है कि लाइसेंस खत्म होने के बाद भी लंबे समय से यहां पर वेनम सेंटर किस तरह से संचालित हो रहा था और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। छापेमारी के दौरान वेनम सेंटर में संचालक मौके पर नहीं था, लेकिन केंद्र के स्वामी नितिन कुमार का प्रतिनिधि विष्णु मौजूद था और उसकी मौजूदगी में ही छापेमारी की गई। हालांकि विष्णु का कहना है कि वह 24 घंटे सेंटर में ही रहता है, लेकिन सांपों के जहर की सप्लाई कहां की जाती है, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है।
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