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कांवड़ियों ने चिढ़ाया तो फूटा गजराज का गुस्सा, दौड़ाकर पलट दी ट्रैक्टर-ट्रॉली, बाल-बाल बचे लोग, देखें वीडियो – Uttarakhand

इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)उत्तराखंड में कांवड़ियों के उत्पात से आम जनता ही नहीं वन्य जीव भी परेशान हो गए हैं। रात के समय वन क्षेत्र में कांवड़ियों के भंडारे के दौरान तेज आवाज में बज रहे डीजे और हाथियों को चिढ़ाने से गजराज इतना क्रोधित हो गए कि कांवड़ियो की ट्रैक्टर ट्राली को पलट दिया।गनीमत रही कि गुस्साया हाथी पांडाल में नहीं घुसा अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि इस दौरान एक व्यक्ति हाथी की चपेट में आने से घायल हो गया। वहीं, वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ दिया।उत्तराखंड में इन दिनों कावड़ यात्रा चरम पर है। डाक कांवड़ के चलते जहां हरिद्वार और ऋषिकेश पूरी तरह से पैक हैं, वहीं देहरादून में भी कावड़ियों का आवागमन हो रहा है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने कांवरियों के लिए रूट निर्धारित किया हुआ है लेकिन फिर भी कांवड़िये कहीं भी रूक कर मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।शनिवार को रात के समय लच्छीवाला रेंज के अंतर्गत देहरादून मार्ग पर मणिमाई मंदिर के पास कावड़ियों ने पांडाल लगाया हुआ था। कांवड़ियों ने तेज आवाज में डीजे भी बजा रखा था। साढ़े आठ बजे के लगभग मणिमाई मंदिर के पीछे से एक नर और मादा हाथी अपने शिशु के साथ जंगल से सड़क पार करने के लिए किनारे पर पहुंचे थे।हाथियों को देखकर कांवड़िये जोर-जोर से शोर मचाने लगे। इतना ही नहीं कांवड़ियों ने साउंड सिस्टम की आवाज और तेज कर दी और हाथियों को चिढ़ाते हुए उनकी वीडियो बनाने लगे जिस पर नाराज हाथी ने चिंघाड़ना शुरू कर दिया लेकिन कांवड़िये नहीं माने और हाथियों को चिढ़ाते रहे। जिस पर क्रोधित होकर हाथी ने पांडाल के बाहर खड़ी कांवड़ियों की दो ट्रालियों को पलट दिया।हाथियों का गुस्सा देखकर कांवड़ियों में हड़कंप मच गया और वे इधर से उधर भागने लगे। गनीमत रही कि नाराज हाथी पंडाल के भीतर नहीं घुसा नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि इस दौरान एक व्यक्ति गुस्साए हाथी के पैर के नीचे आ गया जिससे उसका पैर टूट गया। वहीं घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के दरोगा पूरण सिंह रावत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने तत्काल पंडाल को खाली करवाया। रात्रि में गश्त कर रहे वन विभाग के कर्मचारियों ने हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेज दिया।लच्छीवाला वन क्षेत्र में जिस जगह पर कावड़ियों ने तेज साउंड सिस्टम के साथ पांडाल लगाया था वहां पर हाथी कॉरिडोर है। यहीं से हाथी जंगल के एक सिरे से निकलकर दूसरे सिरे तक जाते हैं। दिन के समय यातायात के चलते उनकी आवाजाही बाधित होती ही है लेकिन अब रात के समय तेज आवाज और छेड़छाड़ भी इन वन्य जीवों को परेशान कर रही है। जिसका खामियाजा शनिवार को हाथी के हमले के रूप में कांवड़ियों को भुगतना पड़ा। यदि इस तरह की घटनाओं पर रोक ना लगाई गई तो भविष्य में बड़ी घटना हो सकती है।

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