उत्तराखंड में विधवा महिला ने कराया लिव-इन रिलेशनशिप का पहला रजिस्ट्रेशन, ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा है ये मामला – Uttarakhand

इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)नैनीताल: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसी कड़ी में हल्द्वानी के ग्रामीण क्षेत्र से एक ऐतिहासिक मामला सामने आया है. जहां एक विधवा महिला ने अपने पार्टनर के साथ लिव-इन रिलेशनशिप का पहला आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कराया है.हल्द्वानी एसडीएम परितोष वर्मा ने बताया कि यह रजिस्ट्रेशन शुक्रवार को किया गया है. उन्होंने बताया कि महिला विधवा है और उसका एक बच्चा भी है. यह मामला इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह उत्तराखंड के किसी ग्रामीण क्षेत्र से सामने आया पहला रजिस्ट्रेशन है, जिसे कानून के तहत विधिवत स्वीकार किया गया है.रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्यगौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने 27 जनवरी 2024 को यूसीसी लागू किया था. इसके तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले हर जोड़े को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है. शहरी क्षेत्रों में इसकी जिम्मेदारी नगर आयुक्त (रजिस्ट्रार) को दी गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दायित्व एसडीएम के पास है. रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और आवेदन की स्वीकृति या अस्वीकृति की समयसीमा 30 दिन निर्धारित की गई है. नियमों के अनुसार अगर कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन में रहता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसमें 6 महीने तक की सजा, 25 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.लोग खुद करवा रहे रजिस्ट्रेशनहल्द्वानी का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. क्योंकि यह ग्रामीण समाज की सोच में आ रहे बदलाव का संकेत देता है. अब तक लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समाज में तमाम पूर्वाग्रह थे, लेकिन कानून की स्पष्टता और अधिकारों की जानकारी के चलते लोग सामने आ रहे हैं और अपनी मर्जी से जीवन जीने के फैसले को कानूनी स्वरूप दे रहे हैं. यह पहल न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है, बल्कि समाज में बदलती सोच और कानून के प्रति जागरूकता का भी प्रमाण है.

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