क्या अब कभी उभर पायेगा” उत्तराखंड क्रांति दल “? कई युवाओं ने एक साथ दिया UKD से इस्तीफा – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड क्रांति दल को आज बहुत बड़ा झटका लगा है , वैसे ही उत्तराखंड की क्षेत्रिय पार्टी का प्रदर्शन पिछले कई सालों से खराब रहा है । उत्तराखंड क्रान्ति दल अपना चुनावचिन्ह तक बचा नहीं पाया ।पार्टी के अंतर्कलह वक्त बेवक्त जनता के सामने आते रहे है जिससे उत्तराखंड की जनता ने UKD पर विश्वास जताना बंद कर दिया था ।जहाँ UKD के पुराने नेता कभी धरातल पर नहीं दिखते है ना ही कभी सत्ता की गलत नीतियों के खिलाफ खड़े होते है वहीं विगत कुछ वर्षो से कुछ युवा ही थे जिन्होंने UKD का नाम आगे बढ़ाया ।अक्सर ये युवा UKD का झंडा हमेशा आगे ले कर चलते रहे ।लेकिन उत्तराखण्ड क्रांति दल की कार्यशैली से नाराज होकर अब युवाओं ने UKD से सामूहिक इस्तीफे की घोषणा की है जिसमे केंद्रीय मीडिया प्रभारी मोहित डिमरी ,उत्तराखण्ड क्रांति दल के छात्र प्रकोष्ठ उत्तराखण्ड स्टूडेंट्स फेडरेशन के केंद्रीय अध्यक्ष लूशुन टोडरिया,केंद्रीय संगठन मंत्री राकेश बिष्ट,सैनिक प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रमोद काला,केंद्रीय प्रवक्ता के रूप मे जुड़े युवा प्रांजल नौडियाल,छात्र प्रकोष्ठ के कुमाऊं संयोजक अरविंद बिष्ट,केंद्रीय संगठन मंत्री पंकज उनियाल,गढ़वाल सयोंजक छात्र प्रकोष्ठ आशीष नौटियाल,पिथौरागढ़ जिलाध्यक्ष छात्र प्रकोष्ठ सुरेंद्र लष्पाल,नैनीताल जिलाध्यक्ष छात्र प्रकोष्ठ दीपक भारती,योगेश बिष्ट,गगन नेगी,कौशल्या बिष्ट,पंकज पोखरियाल, पूरण भंडारी,अनिल सिंधवाल,पीसी भारद्वाज,हिमांशू नेगी,प्रमोद चौहान,शशांक बहुगुणा,शुभम चौहान,विनोद पँवार,दीपक भट्ट,लक्ष्मण पँवार सहित सैकड़ों लोगों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया ।युवाओं का कहना था कि” शहीदों के सपनों को पूरा करने के लिए हम दल से जुड़े और हमने मूल निवास भू कानून जैसे मुद्दे उठाकर प्रदेश भर में बड़ा आंदोलन किया । उसमें भी उत्तराखण्ड क्रांति दल के शीर्ष लीडरों को युवाओं के नेतृत्व से असुरक्षा की भावना हुई ।हमने भू कानून, मूल निवास की लड़ाई को गैरराजनीतिकरूप से जनता के लड़ाई घोषित किया था उसके उपरांत हर स्वाभिमान महारैली में यूकेडी का एक सूत्रीय एजेंडा मंच हथियाने का रहता था न कि जनता के साथ खड़े होकर मुद्दों की लड़ाई लड़ने का । इससे दुःखी होकर पद और पार्टी से इस्तीफ़ा देना पड़ रहा है परंतु पहाड़ के हित की लड़ाई को और भी जोरदार तरीके से लड़ा जाएगा ।मूल निवास,सशक्त भू कानून, बेरोज़गारी, परिसीमन और पहाड़ी समाज की उपेक्षा हम लोगों के मुख्य मुद्दे है जो हम लड़ते रहेंगे ।”

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