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दिन की शुरुआत पंजाब के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर को सम्मानित करते हुए ‘मैं रहां ते नहीं तुर्दा – रिमेंबरिंग सुरजीत पातर’ नामक सत्र से हुई। पंजाबी गायक मनराज पातर और डीडीएलएफ फेस्टिवल गाइड जस्सी संघा ने एमी सिंह के साथ एक चिंतनशील संवाद में भाग लिया, जिसमें पंजाबी साहित्य में सुरजीत पातर की विरासत व कविता और संस्कृति में उनके योगदान को एक मार्मिक श्रद्धांजलि दी गई।
इसके बाद ‘इंडिया एंड ए शिफ्टिंग वर्ल्ड ऑर्डर’ शीर्षक से एक सत्र आयोजित हुआ, जिसमें लेखिका मोना वर्मा के साथ बातचीत में आईपीएस अशोक कुमार और मेजर जनरल शम्मी सभरवाल शामिल हुए। वक्ताओं ने वैश्विक मंच पर भारत की उभरती भूमिका पर चर्चा के साथ भू-राजनीतिक बदलावों और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर देश के प्रभाव पर बात की। इस अवसर पर बोलते हुए मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने कहा, “अमेरिका के लिए असली खतरा रूस नहीं, बल्कि चीन है। ट्रम्प को छोड़कर पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने और देशों में दुस्साहस किया है। तालिबान पाकिस्तान का एक उत्पाद है, जिसे अमेरिका पर हमला करने के लिए बनाया गया था। वहीं अमेरिका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है की एक अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने भारतीयों का खुलकर समर्थन किया है, जो संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।”
आईपीएस अशोक कुमार ने कहा, “हमारे पड़ोसी हमें अमित्र गठबंधनों से घेरना चाहते हैं। 1971 से ही पाकिस्तान की आईएसआई ने आतंकवाद और अन्य तरीकों से भारत को अस्थिर करने के लिए ‘हजारों कट’ की रणनीति अपनाई है। फिर भी, विश्व व्यवस्था बदल रही है और जल्द ही भारत के पक्ष में होगी।”
इसके बाद ‘मैं तैनू फेर मिलंगी – ए टाइमलेस टेल ऑफ़ लव’ सत्र में कालातीत प्रेम की थीम पर चर्चा हुई। सौम्या कुलश्रेष्ठ और हरीश बुधवानी ने भारत की सबसे प्रिय कवियों में से एक अमृता प्रीतम को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी, जिसमें उन्होंने मन मोह लेने वाले विचार प्रस्तुत किए और रोमांस, तन्यकता और अभिलाषा की उनकी विरासत के बारे में चर्चा करी।
बाद में ‘हरस्टोरी इन वर्स 2.0’ नामक सत्र में स्पोकन वर्ड आर्टिस्ट केना श्री, आंचल अनीता धारा, निधि नरवाल और एमी सिंह शामिल रहे। पैनल ने महिलाओं की कहानियों पर शक्तिशाली दृष्टिकोण प्रस्तुत किए और कविता के माध्यम से महिलाओं के अनुभवों और अभिव्यक्तियों की गहरी समझ को बढ़ावा दिया।
‘द लिटरेरी पल्स ऑफ़ इंडिया’ में लेखक अरुण माहेश्वरी, अजय जैन, नमिता दुबे और अश्विता जयकुमार ने समकालीन साहित्य पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। मोना वर्मा द्वारा संचालित इस सत्र ने आज भारतीय साहित्य को आकार देने वाली धाराओं पर एक सूक्ष्म नज़र डालते हुए साहित्यिक परिदृश्य को परिभाषित करने वाले विषयों, आवाज़ों और सांस्कृतिक बदलावों की बात की।
सत्र ‘द कंटूर्स ऑफ़ पीरियड सिनेमा – कैरेक्टर्स, कॉस्ट्यूम्स एंड नैरेटिव्स’ में फिल्म व रंगमंच अभिनेता रजित कपूर और कॉस्ट्यूम डिजाइनर पिया बेनेगल के बीच बातचीत हुई, जिसका संचालन दीक्षा ग्रोवर ने किया। चर्चा में पीरियड सिनेमा के पीछे की रचनात्मक प्रक्रिया पर प्रकाश डाला गया, जिसमें वेशभूषा और पात्र विकास के माध्यम से ऐतिहासिक कथाओं को जीवंत करने वाली गहराई पर जोर दिया गया।
महिला सशक्तिकरण की थीम को जारी रखते हुए, ‘डॉन ऑफ द इंडियन गॉडेस – पावर, पर्सपेक्टिव, एंड ए फीमेल गेज़’ में लेखिका व पत्रकार अनुपमा चोपड़ा और अभिनेत्री संध्या मृदुल ने चर्चा करी और जिसका संचालन मिली ऐश्वर्या द्वारा किया गया। इस सत्र में बॉलीवुड में महिला कथाओं के विकास की खोज करते हुए फिल्म उद्योग में महिलाओं की भूमिकाओं और दृष्टिकोणों को परिभाषित करने में कहानी कहने की परिवर्तनकारी भूमिका पर बात की गई।
एक और आकर्षक सत्र, ‘शिफ्टिंग नैरेटिव्स – एवोल्यूशन ऑफ़ द मीडिया डिस्कोर्स’ के दौरान पत्रकार करण थापर ने मोनिका क्षत्रिय के साथ चर्चा की। उन्होंने मीडिया के बदलते परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए भारतीय पत्रकारिता के भीतर कथाएँ और प्रवचन कैसे विकसित हो रहे हैं पर चर्चा करी।
दिन के दौरान, केना श्री द्वारा आयोजित एक ओपन माइक सत्र ने उभरती आवाज़ों को अपनी कविताएँ व कहानियाँ दर्शकों के साथ साझा करने के लिए एक आकर्षक मंच प्रदान किया।
इस फेस्टिवल में ‘यूनिफाइड वी ट्रैवल – डिस्कवरिंग हेरिटेज, पीपल, एंड लैंडस्केप्स’ सत्र में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें लेखक बिक्रम ग्रेवाल, उपन्यासकार चंद्रहास चौधरी और लोकेश ओहरी ने मोना वर्मा के साथ बातचीत की। पैनल में चर्चा की गई कि कैसे यात्रा लोगों को विरासत और परिदृश्यों से जोड़ सकती है, जिससे भारत की विविधता के लिए अधिक सराहना को बढ़ावा मिलता है।
‘वर्ड्स इन मोशन – लोकेटिंग स्टोरीज एंड नैरेटिव्स’ में जेरी पिंटो और ज़ूनी चोपड़ा ने इरा चौहान के साथ बातचीत में साहित्य और जीवन के बीच गतिशील संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहानियों को गति, स्थान और सांस्कृतिक बदलावों द्वारा आकार दिए जाने के तरीकों के बारे में चर्चा करी।
दिन का समापन पंजाब की संगीत विरासत की एक उत्साही प्रस्तुति ‘द धुन ऑफ पंजाब’ के साथ हुआ। जस्सी संघा के साथ बातचीत में पंजाबी गायक बीर सिंह ने दर्शकों को पंजाबी संगीत की गहराई और लय में एक आकर्षक यात्रा के बारे में बताया। सत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि किस तरह पंजाब के गीतों ने इसकी पहचान को आकार देने में मदद की है, भावनाओं और यादों को जगाया है जो पंजाब की सामूहिक भावना के साथ प्रतिध्वनित होते हैं।
इस अवसर पर डीआईएस के अध्यक्ष डीएस मान, डीआईएस के निदेशक एचएस मान, डीडीएलएफ के फाउंडर व प्रोडूसर समरांत विरमानी उपस्थित रहे।
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