नौकुचियाताल में आयोजित हुआ यूके आरएसएसडीआई का डायबिटीज के ऊपर वार्षिक सेमीनार
भीमताल (नैनीताल) । जब आप मधुमेह यानि डायबिटीज शब्द सुनते हैं, तो सबसे पहला विचार रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ने के बारे में आता है। इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं, पर समय रहते इसपर नियंत्रण न कर पाना शरीर के कई अन्य अंगों के लिए भी मुसीबतों का सबब बन जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल में रखने की सलाह देते हैं। ब्लड शुगर का स्तर लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहना इसकी जटिलताओं को बढ़ाने वाला माना जाता है। डायबिटीज के कारण बढ़ती इसी तरह की जटिलताओं और इससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करने के लिए यूके आरएसएसडीआई वार्षिक सेमीनार का आयोजन करती है। इस बार भी भीमताल स्थित नौकुचियाताल में इस सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें देश के कोने-कोने से आये डॉक्टरों ने अपने विचार रखे।
भीमताल स्थित नौकुचियाताल के एक रिजॉर्ट में दो दिवसीय यूके आरएसएसडीआई का चौथा वार्षिक सेमीनार रविवार को संपन्न हुआ। रविवार को सेमीनार का शुभारंभ ऋषिकेश एम्स की निदेशक डॉ. मीनू और संयोजक यूके आरएसएसडीआई सोसायटी के चेयरमैन और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नीलांबर भट्ट ने किया। सेमीनार में सोसाइटी की ओर से प्रकाशित पुस्तिका प्रिंसिपल एंड प्रैक्टिस ऑफ क्लीनिक डायबिटीज का विमोचन किया गया। पत्रिका का संपादन डॉ. रविकांत, डॉ. नीलांबर भट्ट, डॉ. संजय साह और दीपक रस्तोगी ने किया। ऋषिकेश एम्स की निदेशक डॉ. मीनू ने कहा कि संतुलित जीवन शैली से डायबिटीज को रोकने के साथ उसके दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है। डॉ. नीलांबर भट्ट ने कहा कि व्यायाम, योग और तनाव रहित जीवनशैली भी डायबिटीज के रोकने के लिए आवश्यक है।
संतुलित खानपान से नियंत्रित रहेगा मधुमेह:- डॉ. नीलांबर भट्ट
यूके आरएसएसडीआई के वार्षिक सेमीनार में देश भर के 25 मधुमेह विशेषज्ञों ने डायबिटीज के दुष्प्रभाव से बचाव को लेकर विचार रखे। कहा कि संतुलित खानपान से मधुमेह नियंत्रित होगा। यूके आरएसएसडीआई सोसायटी के चेयरमैन और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नीलांबर भट्ट ने कहा कि वर्तमान में युवाओं में डायबिटीज का बढ़ना चिंता का विषय है। डॉ. नीलांबर भट्ट ने कहा कि समय रहते अगर डायबिटीज का बचाव नहीं किया गया तो किडनी, आंख, पेट और नसों के खराब होने के साथ हार्टअटैक की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज से बचाव के लिए लोगों को खानपान का विशेष ध्यान रखते हुए फास्टफूड का सेवन न करने, रोजाना सुबह व्यायाम करने, नशे और तनाव से दूर रहने के साथ शुगर पर हमेशा कंट्रोल रखने को कहा। साथ ही डायबिटीज की शिकायत पर चिकित्सक की सलाह लेने को कहा।
मधुमेह से बचने के लिए रोजाना एक्सरसाइज जरूरी
ऋषिकेश एम्स में एचओडी प्रोफेसर डॉ रविकांत ने कहा टाइप वन डाइबटीज से पीड़ित बच्चों के लिए जीवन रक्षक इंसुलिन निशुल्क बांटा जा रहा है। पूरे देशभर में यह अभियान चल रहा है। स्कूली बच्चे को स्कूल का सर्टिफिकेट देना होगा। जिससे उसको यह इंसुलिन मिल सकेगा। वहीं डॉ रविकांत ने कहा टाइप-2 डायबिटीज होने में बड़ा फैक्टर मोटापा भी होता है। शरीर का वजन बढ़ने पर टिश्यू में फैट की मात्रा बढ़ सकती है। इसकी वजह से इंसुलिन के प्रति रेजिस्टेंस हो सकता है। हालांकि, हर केस में ऐसा नहीं होता है लेकिन मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का एक बड़ा खतरा हो सकता है। अगर रोजाना एक्सरसाइज न किया जाए तो शरीर के मसल्स कमजोर होने लगते हैं और वेट बढ़ने लगता है। इसकी वजह से डायबिटीज बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए वर्कआउट रूटीन का हिस्सा होना चाहिए। परिवार में किसी के डायबिटीज होने से दूसरी पीढ़ी में भी यह पहुंच सकता है। मतलब डायबिटीज का कारण जेनेटिक भी हो सकता है। इसलिए सेहत का पूरी तरह ख्याल रखना चाहिए।
युवाओं में डायबिटीज का बढ़ना चिंता का विषय:- डॉ एसडी जोशी
उत्तराखंड के जाने-माने फिजीशियन डॉ एसडी जोशी ने कहा सेमिनार में डायबिटीज को लेकर व्यापक मंथन हुआ है। जिसके सार्थक परिणाम सामने निकलकर आयेंगे। डॉ एसडी जोशी ने डायबिटीज के बारे में बिस्तार से बताते हुए कहा कि भोजन के ऊर्जा बनने से पहले यह हमारे रक्त में ग्लूकोज के रूप में जमा हो जाता है। फिर हमारी कोशिकाएं उस ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने के लिए इस्तेमाल करती हैं। ग्लूकोज को हमारी कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए एक हार्माेन की जरूरत होती है, जिसे इंसुलिन कहा जाता है। इंसुलिन कम होने से ग्लूकोज कोशिकाओं तक ठीक से नहीं पहुंच पाता और खून में जमा होने लगता है। बाहर से खाना खाने के बाद ग्लूकोज शरीर में प्रवेश करता रहता है। इस स्थिति को शुगर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर बहुत कम इंसुलिन बनाता है, जिसे शरीर इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो इसे टाइप एक डायबिटीज कहा जाता है। इन मरीजों को इंजेक्शन के जरिए बाहर से इंसुलिन लेना पड़ता है। वहीं अगर इंसुलिन बन रहा हो लेकिन शरीर उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहा हो तो उसे टाइप दो डायबिटीज कहते हैं। डॉ एसडी जोशी ने कहा कि इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन एटलस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वयस्क आबादी में 2030 तक डायबिटीज के लगभग 101 मिलियन और 2045 में 134 मिलियन मामले होंगे। इतना ही नहीं डायबिटीज से पीड़ित युवाओं और बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है।
शरीर के कई अंगो पर असर डालता है डायबिटीज:- डॉ अमित रस्तोगी
वहीं डॉ. अमित रस्तोगी ने वृद्धावस्था में शुगर का उपचार और इससे होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया। डॉ अमित रस्तोगी बताते हैं जिन लोगों को हाई डायबिटीज की समस्या बनी रहती है, उनमें समय के साथ इसका असर कई अन्य अंगों पर भी देखा जा सकता है। डायबिटीज के रोगियों में किडनी, आंखों और तंत्रिकाओं से संबधित जटिलताओं का खतरा सबसे अधिक होता है। इस तरह की समस्याओं से बचे रहने के लिए नियमित रूप से दवाइयों के साथ लाइफस्टाइल पर ध्यान देते रहना सभी के लिए आवश्यक है।
इस मौके पर डॉ. विमल उप्रेती ने मधुमेह में दवाओं से शुगर कम होने की जानकारी दी। सेमीनार में विशेषज्ञ राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन मक्कड़, डॉ. पारुल सिंघल, डॉ. सुनील कुमार मिश्रा, डॉ. रवि कांत, डॉ. कल्याणी, डॉ. तनुज भाटिया, डॉ. नमृता गौड़, डॉ. आरए केडिया, डॉ. मोहन तिवारी, डॉ. केसी लोहनी, डॉ. मनोज, डॉ. केसी शर्मा, डॉ. डीसी पंत, डॉ. सीएस जोशी, डॉ. त्रिलोचन साह, डॉ. अरुण कपूर, डॉ. देवाशीष गुप्ता आदि ने भी विचार रखे। अंत में डॉ नीलांबर भट्ट द्वारा सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद प्रेषण किया गया ।
By Arun Pratap Singh my uttarakhand news Bureau DEHRADUN, 16 May: Serious questions are once…
my uttarakhand news Bureau DEHRADUN, 16 May: Chief Minister Pushkar…
By Arun Pratap Singh my uttarakhand news Bureau DEHRADUN, 16 May: A workers’ protest in the Selaqui industrial area today…
Satpal Maharaj hands over cheques of insurance to CM my uttarakhand news Bureau DEHRADUN, 16…
my uttarakhand news Bureau DEHRADUN, 16 May: St Thomas’ College, proudly celebrated its 110th Annual Speech and Prize Day on Saturday, marking one of the…
my uttarakhand news Bureau CHAMPAWAT, 16 May: Chief Minister Pushkar Singh Dhami has expressed deep sorrow over…