देहरादून, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को देहरादून में युवा शक्ति का विराट उत्सव देखने को मिला। देहरादून महानगर दक्षिण और उत्तर के 11 स्थानों पर आयोजित युवा सम्मेलनों में करीब 3200 विद्यार्थियों, युवा व्यवसायियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत आयोजित इन युवा सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य युवा शक्ति को राष्ट्र एवं समाज के प्रति उसके दायित्वों से जोड़ना रहा। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, अनुशासन और सामर्थ्य को सकारात्मक दिशा देने के साथ ही सेवा, सामाजिक समरसता, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति के भाव को मजबूत करने पर जोर दिया गया।11 स्थानों पर दिखा युवा जोशदेहरादून महानगर दक्षिण के लक्ष्मण नगर, केदार नगर, सुभाष नगर, शिवाजी नगर, विवेकानंद नगर, प्रेम नगर, रामनगर तथा गुरु राम राय नगर में युवा सम्मेलन आयोजित हुए। प्रत्येक स्थान पर युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।लक्ष्मण नगर में हिंदू नेशनल स्कूल में आयोजित सम्मेलन को महानगर कार्यवाह सत्येंद्र जी ने संबोधित किया। केदार नगर में ट्यूलिप फार्म, बद्रीपुर में आयोजित कार्यक्रम में सह विभाग प्रचारक सौरभ जी ने युवाओं को राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनकी भूमिका का बोध कराया।सुभाष नगर के लव डेल स्कूल में आयोजित सम्मेलन में महानगर प्रचारक देवराज जी ने युवाओं के समक्ष विचार रखे। विवेकानंद नगर स्थित तिरुपति क्रिकेट अकादमी में क्षेत्र प्रचारक प्रमुख जगदीश जी ने युवाओं को संबोधित किया।प्रेम नगर के दून वैली इंटरनेशनल स्कूल में क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य मनोज निबूरा जी ने युवाओं का मार्गदर्शन किया।रामनगर के गुरु राम राय स्कूल में सह प्रांत प्रचारक चंद्रशेखर जी ने राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। गुरु राम राय नगर के जीआरडी अकादमी, निरंजनपुर में आयोजित सम्मेलन में प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र जी ने युवाओं से अपनी ऊर्जा को राष्ट्र शक्ति में परिवर्तित करने का आह्वान किया।शिवाजी नगर में खेल, गीत और संवाद ने बांधा समांशिवाजी नगर के भवानी बालिका स्कूल में आयोजित युवा सम्मेलन युवाओं की सक्रिय सहभागिता और विविध गतिविधियों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध ईएनटी सर्जन राजेंद्र सिंह ने की। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता भालचंद शिंगड़ जी ने युवाओं को संबोधित किया।यूके से गैस इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री तथा यूपीईएस से पीएचडी प्राप्त भालचंद शिंगड़ वर्तमान में यूपीईएस में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनके अनेक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।इस अवसर पर संघ के क्षेत्र सामाजिक समरसता संयोजक लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल जी, प्रांत सामाजिक समरसता संयोजक राजेंद्र पंत जी तथा शिवाजी नगर के संघचालक चंद्रमोहन गौड़ जी ने भी युवाओं के साथ विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की। खेल और गीत कार्यक्रमों में पदाधिकारियों के साथ युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।‘युवा वर्तमान के परिवर्तन के वाहक’प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र जी ने कहा कि भारत के विकास और सशक्त भविष्य में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान में भी समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और सामर्थ्य का उपयोग राष्ट्रहित, समाजहित और सकारात्मक परिवर्तन के लिए करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जागरण, संगठन और सेवा के कार्य को आगे बढ़ा रहा है। युवाओं को व्यक्तिगत विकास के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।अनुशासन और संस्कार से बनेगी सशक्त राष्ट्र शक्तिसम्मेलनों में वक्ताओं ने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं में अनुशासन, चरित्र निर्माण, सेवा भावना, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और संगठनात्मक चेतना का विकास देश को मजबूत आधार प्रदान करता है।उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व पटल पर एक सशक्त और उभरती हुई शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। ऐसे समय में युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। शिक्षा, कौशल, उद्यमिता, तकनीकी क्षमता और सामाजिक चेतना को राष्ट्रहित से जोड़कर युवा देश की विकास यात्रा को नई गति दे सकते हैं।देहरादून महानगर दक्षिण एवं उत्तर के 11 स्थानों पर आयोजित इन सम्मेलनों में करीब 3200 युवाओं की सहभागिता ने कार्यक्रमों को व्यापक युवा जागरण का स्वरूप प्रदान किया। उत्साह से भरे युवाओं ने राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।शताब्दी वर्ष के इन युवा सम्मेलनों ने संदेश दिया कि संगठित, संस्कारित और संकल्पित युवा शक्ति ही विकसित, समर्थ और सशक्त भारत की आधारशिला बन सकती है।
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