Home News आपका समय बचाएगी धामी सरकार, अब दो दिन में घर के नक्शे होंगे पास; जाने पूरा प्लान – myuttarakhandnews.com

आपका समय बचाएगी धामी सरकार, अब दो दिन में घर के नक्शे होंगे पास; जाने पूरा प्लान – myuttarakhandnews.com

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आपका समय बचाएगी धामी सरकार, अब दो दिन में घर के नक्शे होंगे पास; जाने पूरा प्लान –  myuttarakhandnews.com

Latest posts by Sapna Rani (see all)देहरादून: आवास विभाग, विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास करने के लिए केंद्रीय व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसमें कागजों की जांच उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) के स्तर पर होगी। इस तरह प्राधिकरणों का काम कम होने से नक्शा पास करने में लगने वाला समय कम हो सकेगा। प्राधिकरणों में नक्शा पास करने की प्रक्रिया सरल बनाने को आवास विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके तहत पारदर्शिता पर भी जोर दिया जा रहा है। इस क्रम में उडा भवनों का नक्शा पास करने के लिए केंद्रीयकृत व्यवस्था लागू करने जा रहा है।व्यवस्था के तहत नक्शे एक कॉमन सॉफ्टवेयर के जरिए स्वीकार किए जाएंगे, जो पहले उडा के पास पहुंचेंगे। उडा के स्तर से दस्तावेजों के सत्यापन, भूमि प्रयोग, मालिकाना हक के साथ तकनीकी जांच की प्रकिया दो दिन में पूरी करने के बाद नक्शे संबंधित प्राधिकरण को सौंपे जाएंगे। अभी सबसे ज्यादा समय इस स्तर पर प्राधिकरणों में ही लगता है। इस तरह यह प्रक्रिया प्रथम चरण में पूरी होने पर प्राधिकरण के पास मौका मुआयना और बिल्डिंग बायलॉज देखने का ही काम बचेगा। इस तरह प्राधिकरण समय से नक्शा मंजूर कर सकेंगे।नई केंद्रीय व्यवस्था पर बुधवार को उडा कार्यालय में अपर आयुक्त आवास पीसी दुम्का ने इंजीनियर, आर्किटेक्ट के साथ मंथन किया। इसमें चीफ टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव, उत्तराखंड इंजीनियर एंड आर्किटेक्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डीएस राणा, महासचिव सचिन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष गिरधारी अरोड़ा भी शामिल हुए।इंजीनियरों ने किया स्वागतउत्तराखंड इंजीनियर एंड आर्किटेक्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डीएस राणा ने इसे ईज ऑफ डूइंग की दिशा में अहम कदम बताया। राणा के मुताबिक, अभी दस्तावेजों की जांच में प्राधिकरणों के स्तर से 10-15 दिन लगते हैं जबकि आवासीय नक्शा पास करने को पहले से 15 दिन का समय तय है। ऐसे में ये काम पासपोर्ट की तर्ज पर केंद्रीय एजेंसी के स्तर से दो दिन में होने से प्रकिया सरल हो सकेगी। अभी प्राधिकरणों के स्तर पर ये काम पटवारियों द्वारा किया जाता है, जो पहले ही कई अन्य कामों में उलझे होते हैं। ऐसे में प्रस्तावित व्यवस्था लागू होगी तो प्रक्रिया में समय बचने के साथ ही पारदर्शिता भी आएगी।

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