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उत्तराखंड में बारिश का बदलता पैटर्न बढ़ा रहा आपदाओं का खतरा, एक्सपर्ट जता रहे चिंता – Uttarakhand

इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)उत्तराखंड में बारिश के पैटर्न में बदलाव आपदाओं के खतरे को बढ़ा रहा है। कम समय में ज्यादा बारिश होने से आपदा की घटनाएं तबाही मचा रही हैं। प्रदेश में मानसून की दो ब्रांचों अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून के फ्लो के टकराने से ज्यादा बारिश हो रही है। प्रदेश में हर साल मानसून के सीजन में अतिवृष्टि की घटनाएं सामने आ रही हैं। मौसम विभाग ने इस साल भी मानसून में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की साठ फीसदी संभावना जताई है।क्या कहते हैं मौसम एक्सपर्ट्स?मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. बिक्रम सिंह ने बताया कि पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में मानसून सीजन में बारिश तो सामान्य या सामान्य से पांच से दस फीसदी ज्यादा एवं एक समान दर्ज की जा रही है। लेकिन रेनी डे की संख्या घटी है। ऐसा देखा जा रहा है कि जितनी बारिश एक सप्ताह में होती थी, वह तीन दिन में हो जा रही है। उधर, जो मानसून सीजन जून से सितंबर तक एक समान होता था। वह अब जुलाई एवं अगस्त में ज्यादा रहता है।डॉ. सिंह के मुताबिक उत्तराखंड में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून की दो ब्रांच रहती है। इन दिनों दोनों सिस्टम का फ्लो आपस में टकरा रहा है, इससे ज्यादा बारिश उत्तराखंड में मिल रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ. रोहित थपलियाल कहते हैं कि उत्तरकाशी में मध्यम तक बारिश मिली है। मंगलवार को 30 एमएम तक बारिश यहां दर्ज की गई है।जून-जुलाई में कम बारिश, अगस्त में पकड़ी रफ्तारइस साल मानसून सीजन में जून-जुलाई में सामान्य से कम बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी निदेशक डॉ. थपलियाल के मुताबिक जुलाई माह में प्रदेशभर में सामान्य 417.8 एमएम से 16 फीसदी कम 349.9 एमएम बारिश हुई। जून-जुलाई माह में प्रदेश में मानसून की बारिश सामान्य 594.6 एमएम से एक फीसदी कम 590.6 एमएम हुई है। दो माह में प्रदेश के आठ जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। बागेश्वर, देहरादून, टिहरी गढ़वाल में ही सामान्य से अधिक बारिश हुई है। अगस्त माह में अब तक उत्तराखंड में सामान्य 69.7 एमएम की तुलना में 35 फीसदी अधिक 94.1 एमएम बारिश हुई है।पहाड़ों में इसलिए होती है ज्यादा बारिशमौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बादल फटना एक तकनीकी शब्द है। जब बहुत ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह रुक जाते हैं। पानी की बूंदों का वजन बढ़ने से बादल का घनत्व काफी बढ़ जाता है और फिर अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है। बादल फटने पर 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से पानी बरसता है। इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। पानी से भरे बादल जब हवा के साथ आगे बढ़ते हैं तो पहाड़ों के बीच फंस जाते हैं। पहाड़ों की ऊंचाई इसे आगे नहीं बढ़ने देती है। पहाड़ों के बीच फंसते ही बादल पानी के रूप में परिवर्तित होकर बरसने लगते हैं।

Nandni sharma

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