हरितालिका तीज पर सजेगा आस्था और संस्कृति का भव्य रंग –

देहरादून। गोरखाली समाज में हरितालिका तीज का पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाने की परंपरा रही है। अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए सुहागिन महिलाएं तथा श्रेष्ठ वर की प्राप्ति की कामना से कन्याएं भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। इसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गोरखाली समाज की ओर से 6 सितंबर को भव्य तीज मेले का आयोजन किया जाएगा।आयोजकों के अनुसार, हरितालिका तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह से जुड़ा है। शिव पुराण, लिंग पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार हिमालय पुत्री पार्वती ने बाल्यावस्था से ही भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की तपस्या से चिंतित उनके पिता हिमालय के समक्ष एक दिन नारद मुनि भगवान विष्णु का विवाह प्रस्ताव लेकर पहुंचे। भगवान विष्णु जैसे सर्वगुण संपन्न वर का प्रस्ताव पाकर हिमालय प्रसन्न हुए, लेकिन जब यह बात माता पार्वती को ज्ञात हुई तो उन्होंने अपनी सखियों के समक्ष भगवान शिव को ही अपना पति मानने की इच्छा प्रकट की।कहा जाता है कि सखियां माता पार्वती को वन में ले गईं और वहां उन्हें छिपाकर रखा। इसी कारण इस व्रत का नाम हरितालिका पड़ा। वन में माता पार्वती ने भगवान शिव का पार्थिव लिंग बनाकर बेलपत्र, पुष्प और फलों से विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। उनकी अटूट श्रद्धा और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने साक्षात प्रकट होकर उन्हें विवाह का वचन दिया। बाद में हिमालय ने भी भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को स्वीकार किया। तभी से भाद्रपद शुक्ल तृतीया को महिलाएं अखंड सौभाग्य और कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए हरितालिका तीज का व्रत करती आ रही हैं।संस्कृति और परंपरा का होगा भव्य संगमगोरखाली समाज की ओर से आयोजित तीज मेले में इस वर्ष करीब 12 से 15 हजार महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में तीज समूह नृत्य, पारंपरिक तीज गायन, लाइव तीज गायन, ‘तीज सुंदरी’ और ‘तीज प्रिंसेस’ प्रतियोगिता के साथ वरिष्ठ महिलाओं का सम्मान किया जाएगा। इसके अलावा गोरखाली समाज के पारंपरिक एवं स्वादिष्ट व्यंजनों का भी आगंतुक आनंद ले सकेंगे।भव्य तीज मेला 6 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक महिंद्रा ग्राउंड, गढ़ी कैंट, देहरादून में आयोजित किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य गोरखाली समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा सामाजिक एकता को मजबूत करना है।आयोजन की अध्यक्ष माया पवार ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस दिव्य एवं भव्य तीज मेले का आनंद लें और अपनी संस्कृति एवं सभ्यता के संरक्षण में सहभागी बनें।आयोजन को सफल बनाने में संस्था अध्यक्ष प्रभा शाह, सचिव ज्योति कोटिया, संरक्षक सूर्य विक्रम शाही, गोदावरी थपली, पूजा सुब्बा चंद्र, मंजू कार्की, सुनीता छेत्री, प्रमिला खत्री, मीनू छेत्री, विनीता छेत्री, संध्या थापा, निर्मला थापा, पूनम गुरुग, मधु कैनाल, कविता माहुर, पुष्पा छेत्री, विनीत खत्री, उमा उपाध्याय, सविता छेत्री, सरोज गुरुग, उषा राणा, देवेंद्र शाही, एं.बी. खत्री, टीकू मगर, मधुसूदन शर्मा, संजय मल, बुद्धिमान थापा, नीलकमल चंद, कविता क्षेत्री, राजेन्द्र गुरुंग, मधु क्षेत्री सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य जुटे हुए हैं। आयोजकों ने सभी क्षेत्रवासियों से परिवार सहित मेले में पहुंचकर धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता के इस पर्व को भव्य बनाने का आह्वान किया है।

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