
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में THDC की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में बड़ा हादसा हो गया. टनल के अंदर अचानक मलबा और पानी आने से करीब 22 मजदूर फंस गए थे. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 20 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है, जिनमें 7 की मौत हो गई है और 14 लोग घायल हैं. जबकि बाकी बचे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. ताजा जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू अभियान अभी जारी है टीम ने 2 लोगों को ट्रेस कर लिया गया है. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान का ताजा वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि टनल में फंसे मजूदर को रेस्क्यू किया जा रहा है.
हादसे के वक्त टनल में थे 22 लोगTHDC के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि जब ये हादसा हुआ, तब टनल के अंदर कुल 22 लोग मौजूद थे. शुरुआती राहत और बचाव कार्य के दौरान अब तक 20 लोगों को बाहर निकाल लिया गया है, जिनमें से 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 अन्य लोगों घायल हो गए हैं. जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
प्रशासन ने बताया कि हादसे में मरने वालों में एक-एक व्यक्ति उत्तराखंड के टिहरी और चमोली के हैं, जबकि अन्य सभी लोग बिहार और झारखंड के रहने वाले हैं.
वहीं, घायलों में ज्यादातर मजदूर झारखंड, बिहार और छतीसगढ़ के रहने वालें हैं. साथ ही एक व्यक्ति पंजाब और एक व्यक्ति की पहचान हिमाचल प्रदेश के निवासी के रूप में हुई है.
अधिकारियों ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन फिलहाल स्थगित दिया गया है, क्योंकि टनल में पानी और कीचड़ बढ़ गई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एक अभी भी लापता है.
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पवार ने बताया कि ये घटना शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुई. पीपलकोटि में बन रही इस हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल के लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी बाहर आ गया.
टनल के द्वार से करीब 1.50 किलोमीटर अंदर ये मलबा और पानी आने से काम कर रहे मजदूर फंस गए. मौके पर SDRF और NDRF की टीमें पूरी ताकत से जुटी हुई हैं. TLDC और SCC की भारी मशीनें मलबा हटाने का काम लगातार कर रही हैं. इसके अलावा टनल से पानी बाहर निकालने के लिए 3 बड़े पंप लगाए गए हैं.पीपलकोटी स्थित THDC टनल के भीतर मलबा एवं पानी आने की सूचना प्राप्त हुई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए @NDRFHQ और @uksdrf की टीमों को तत्काल मौके पर भेजा गया है। जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित एजेंसियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
कई मजदूरों की हालत गंभीरसुरक्षित बाहर निकाले गए 14 मजदूरों में से 3 से 4 मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. इन सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च स्तर की बेहतर मेडिकल सुविधा देने के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी स्थिति का लिया जायजाघटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में एक उच्च स्तरीय बैठक की और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने बताया कि जैसे ही शाम को इस घटना की सूचना मिली, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया था.
मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि सरकार की इस समय सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. सभी वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अमला और राहत एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं. प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ घंटों में अंदर फंसे सभी लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया जाएगा.
चमोली जनपद में सोमवार दोपहर को अचानक हुई भारी बारिश ने तमक नाले को उफान पर ला दिया था. नाले में पानी का तेज बहाव इतना शक्तिशाली था कि सीमा सड़क संगठन द्वारा हाल ही में बनाया गया लोहे का पुल पूरी तरह बह गया था. क्षेत्र में दूसरी बार आई इस बाढ़ ने किसानों की सेब की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचाया था.
चमोली में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही थी. सोमवार को दोपहर के समय बारिश ने जोर पकड़ा था. पहाड़ी इलाका होने के कारण छोटी-छोटी नदियां और नाले अचानक उफान पर आ जाते हैं. तमक नाला भी इसका अपवाद नहीं रहा था. पानी का तेज बहाव देखकर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी. हालांकि तब बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली थी, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी.
गौरतलब है, सीमा सड़क संगठन ने तमक क्षेत्र में लोहे का नया पुल बनाया था. यह पुल स्थानीय आवागमन और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण था. लेकिन नाले में आई बाढ़ ने इसे कुछ ही देर में बहा दिया था. लाइव तस्वीरों में साफ दिख रहा था कि पुल का ढांचा पूरी तरह टूटकर पानी में समा गया था.
