जैसे कि विदित ही है कि उत्तराखंड क्रांति दल में इन दिनों हलचल मची है ।कई युवाओं ने पार्टी छोड़ दी है ।उत्तराखंड क्रांति दल के स्टूडेंट्स विंग के पूर्व अध्यक्ष लुशुन टोडरिया ने UKD के अध्यक्ष और शीर्ष नेतृत्व को एक खुला पत्र लिखा है ।वो इस लिखते है कि
“कल हमने भारी मन से उत्तराखंड क्रांति दल को छोड़ने का फैसला लिया, हमे दल को छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया । अब जब हम दल को छोड़ चुके हैं, तब हमें पुनर्विचार करने को कहा जा रहा है ।कुछ दिनों पहले ही पार्टी से जुड़ा एक व्यक्ति हमें कांग्रेस का एजेंट बता रहा है, वो व्यक्ति जो खुद पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा मंत्रियों का प्रचार कर रहा था, दिल्ली वाली पार्टी का प्रवक्ता बना घूम रहा था, पिछले वर्ष अपने फेसबुक पेज से उक्रांद के खिलाफ लिख रहा था, कांग्रेस से लोकसभा टिकट मांग रहा था, वो हमें एजेंट बता रहा है । उस व्यक्ति ने पार्टी में अब जातिवाद और क्षेत्रवादी वाली बातें और राजनीति कर रहा है, सबूत देने हैं तो मैं दे दूंगा । हमने कितनी बार पार्टी अध्यक्ष और शीर्ष नेतृत्व को इस बारे बताया और आगाह किया लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने कुछ नही किया और चुप रहा । मेरे पिताजी स्वर्गीय राजेन टोड़रिया ने जिंदगी भर राज्य के क्षेत्रीय मुद्दों की लड़ाई लड़ी और सत्ता के खिलाफ लिखते रहे, बोलते रहे और आंदोलन करते रहे, उत्तराखंड और क्षेत्रीय हित में फैसला लेते हुए उन्होंने अपने अंतिम समय में अपने जनमंच का उत्तराखंड क्रांति दल में विलय कर दिया था । अपने पिताजी जी से प्रेरणा लेते हुए मैने उत्तराखंड के क्षेत्रीय मुद्दों मूल निवास, भू कानून और गैरसैंण राजधानी को लेकर एक जन आंदोलन खड़ा करने को आगे बढ़ा, जिसमे मोहित डिमरी भाई ,प्रांजल भाई और अन्य युवाओं के साथ मिलकर एक संघर्ष समिति बनाई गई और प्रदेश भर के सामाजिक और क्षेत्रीय संगठनों को इस मंच में एकजुट किया । मैं एक आंदोलनकारियों का बेटा हूं मेरे स्वर्गीय पिताजी और माताजी ने मुझे अपने आदर्श पर चलने की प्रेरणा दी हैं और मैं जीवन पर उसका पालन करता रहूंगा । एक व्यक्ति जिसकी कोई विश्वसनीयता नही है और कल ही पार्टी में आया है वो हमें कांग्रेसी एजेंट बता रहा है और हमारे जन आंदोलन को तोड़ने की साजिश कर रहा है और आप लोग खामोश रहा उल्टा उसका साथ दे रहे हैं ।हमसे कोई पूछता है कि तुम्हारे पार्टी अध्यक्ष और शीर्ष नेतृत्व ना किसी आंदोलन में दिखते हैं, ना किसी कार्यक्रम में दिखते हैं, ना जनता के बीच दिखते हैं और ना सत्ता के खिलाफ बोलते हैं, हम क्या जवाब देते और चुप हो जाते थे, हम चुपचाप दल के लिए और क्षेत्रीय मुद्दे उठाते रहे और आंदोलन खड़ा करने पर मेहनत करते रहे ।लेकिन जब दल में ही हमारे और हमारे जन-आंदोलन के खिलाफ साजिश होने लगी तब हमें पार्टी छोड़ने का फैसला लेना है । जब मूल निवास, भू कानून और गैरसैंण राजधानी के जन-आंदोलन से लाखों उत्तराखंडी आमजन, युवा, महिलाएं जुड़ रहे थे तब साजिश कर उसे कमजोर करने की कोशिश करने वालों की हरकतों के खिलाफ हमें मजबूरी में पार्टी छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा । हमारा उत्तराखण्ड क्रांति दल के लिए हमेशा सम्मान रहेगा । राज्य आंदोलन के दौरान उत्तराखण्ड क्रांति दल का संघर्ष ऐतिहासिक रहा है । उत्तराखण्ड क्रांति दल का आम कार्यकर्ता राज्य आंदोलन से लेकर अभी तक अपना सब कुछ झोंक के राज्य के ज्वलन्त मुद्दों पर संघर्ष करता है । ऐसा निःस्वार्थ कैडर जिस पार्टी में हो उसका उचित सम्मान करना शीर्ष नेतृत्व का कर्तव्य होता है।हम ना कभी कांग्रेस, ना कभी भाजपा और ना अन्य किसी राष्ट्रीय पार्टी में जायेंगे, अब तो जीवन का एक ही उद्द्येश है, मूल निवास, भू कानून और गैरसैंण राजधानी के इस जन-आंदोलन के लिए और मजबूती से लड़ेंगे और जो भी हो उत्तराखंड के लिए मूल निवास, भू कानून और राजधानी गैरसैंण लेकर रहेंगे ।लड़ेंगे, जीतेंगे
आपकालुशून टोडरिया
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