देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। दिसंबर 2025 में वायरल हुई कथित कॉल रिकॉर्डिंग के बाद विपक्ष सहित सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखा है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि अदालत ने स्पष्ट रूप से किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के प्रयास से इनकार किया है।
मंत्री उनियाल ने अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक निर्णय में दर्ज है कि जांच में किसी रसूखदार को संरक्षण देने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कथित रिकॉर्डिंग पर टिप्पणी करते हुए बताया कि इसी ऑडियो में एक ओर अंकिता की आत्महत्या का जिक्र है, तो दूसरी ओर हत्या की चर्चा। जबकि अदालत ने इसे हत्या मानकर तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ लोग हत्या की घटना से ही इनकार कर रहे हैं, जो विरोधाभासी है।
सरकार की ओर से खुली चुनौती देते हुए मंत्री ने कहा कि यदि कोई वैध प्रमाण उपलब्ध है, तो उसे सामने लाया जाए। सरकार किसी भी स्तर की जांच से पीछे नहीं हटेगी। पुलिस और प्रशासन बार-बार अपील कर रहा है कि आरोप लगाने वाले ठोस सबूत लेकर आएं, ताकि उनकी जांच हो सके। उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी राज्य सरकार लेगी।
सीबीआई जांच की मांग पर सुबोध उनियाल ने कहा कि पहले तथ्यों की प्रामाणिकता जांचनी होगी। हाईकोर्ट ने एसआईटी की जांच को उचित ठहराया है और किसी को बचाने का आरोप खारिज किया। मामले सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन वहां भी याचिका खारिज हो गई। फिर भी, यदि कोई पुख्ता प्रमाण सामने आता है, तो सरकार हर प्रकार की जांच के लिए तैयार है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। पूरे प्रदेश की भावनाएं अंकिता के साथ हैं और भाजपा का हर कार्यकर्ता उस बेटी को न्याय दिलाना चाहता है, लेकिन इसका राजनीतिकरण उचित नहीं।
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत अंकिता भंडारी संदिग्ध हालात में लापता हो गई थीं। आरोप है कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य तथा उनके सहयोगियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता ने अनुचित कार्य के लिए दबाव बनाया, जिसके विरोध पर अंकिता की हत्या कर दी गई। अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई और वे फिलहाल जेल में हैं।
मामला उस समय फिर गरमाया जब दिसंबर 2025 में भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने कॉल रिकॉर्डिंग सहित वीडियो जारी किए, जिसमें कथित वीआईपी का जिक्र था। इसके बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा और सुरेश राठौर तथा उर्मिला सनावर को नोटिस जारी किए गए।
यह मामला प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का जोर जांच की निष्पक्षता पर है।
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