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2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में भाजपा के अपनों ने ही बढ़ाई टेंशन, जानिए वो 3 बड़े मामले – myuttarakhandnews.com

2027 assembly elections BJP उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस तैयारियों में जुट गई हैं। दोनों दलों ने अपने- अपने प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन भाजपा के लिए इस समय अपने ही टेंशन बढ़ाने का काम कर रहे हैं। बीते कुछ समय से पार्टी के नेताओं और विधायकों के बयान से पार्टी असहज भी हुई है। ​जो कि 2027 की तैयारियों में मुश्किलें भी खड़ी कर रही हैं। जिसमें ​विधायक उमेश शर्मा काउ, अरविंद पांडेय, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान और प्रकरण शामिल हैं।
केस- 1रायपुर विधायक उमेश शर्मा काउ अपने समर्थकों के साथ प्राइमरी शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल के कार्यालय पहुंचे। काम तो स्कूल के नाम के परिवर्तन का था, लेकिन​ विवाद बढ़ा तो निदेशक की मारपीट तक पहुंच गया। ​विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। निदेशक की पिटाई से पूरे प्रदेश का माहौल गरमा गया। सारे कर्मचारी आंदोलन की राह पर उतर आए। सीएम धामी को तक बीचबचाव करने के लिए आना पड़ा। विधायक को माफी मांगने के लिए कहना पड़ा है। हालांकि विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एसओपी बनाने के निर्देश दे दिए हैं। विधायक को पार्टी अध्यक्ष ने सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। ये मामला चुनाव से पहले पार्टी के सिरदर्द बन गया है। कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाने में लगी है।
केस -2
हरिद्वार सांसद और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत पुलिसिंग और विधायक के प्रकरण पर खुलकर अपनी ही सरकार और संगठन को सलाह देकर कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। त्रिवेंद्र रावत ने पहले बीते दिनों बढ़ती क्राइम की वारदातों और जमीनी प्रकरणों पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। साथ ही सरकार को पुलिसिंग को दुरस्त करने की सलाह दे डाली तो विधायक के प्रकरण पर कहा कि जनप्रतिनिधियों को मर्यादित आचरण रखना चाहिए। उन्होंने ये तक कह दिया कि संगठन के स्तर पर भी अनुशासन को लेकर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। पहली बार नहीं है जब पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत सरकार और संगठन को इस तरह बयानबाजी से टेंशन देने का काम कर चुके हैं। इससे पहले भी विधायक अरविंद पांडेय प्रकरण में विधायक को समर्थन देकर पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं।
केस- 3
पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक अरविंद पांडे भी सरकार और संगठन के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं। उधम सिंह नगर की घटनाओं को लेकर उन्होंने पहले पुलिस और प्रशासन पर निशाना साधा। विधायक को पुलिस का अतिक्रमण का नोटिस आया तो मामला बिगड़ गया। प्रशासन की ओर से अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किए जाने के बाद अरविंद पांडे ने मोर्चा खोला। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, पुलिस मुख्यालय से जांच की मांग की। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण पर जमकर सरकार और संगठन को घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक मदन कौशिक और सांसद अनिल बलूनी ने आनन फानन में अरविंद पांडेय से मिलने का कार्यक्रम जारी कर दिया। ऐसे समय में जब अमित शाह उत्तराखंड दौरे पर थे। इस बीच केंद्रीय नेतृत्व के ​निर्देश पर कार्यक्रम स्थगित हुआ।

Nandni sharma

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