स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- ऊत्तराखण्ड सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की चर्चा शुरू करते हुए भाजपा हाईकमान से इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनुमती मांगी है। धामी सरकार को अब सहमति मिलने का बेसब्री से इंतजार है।
भारत में अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए इस क्षेत्र में एक सख्त कानून बनाने और इसपर नीतिगत लगाम लगाने की अवयश्यक्ता महसूस की गई थी।
राष्ट्र में सबसे पहले यू.सी.सी., नकल कानून आदि कई लोकहित के निर्णय लेने के लिए मशहूर ऊत्तराखण्ड सरकार अब जनसंख्या पर नियंत्रण के विषय पर गहनता से विचार कर रही है।
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बीते विधानसभा सत्र में उत्तराखंड की तेजी से बदलती डैमोग्राफी की समस्या पर रुद्रपुर से भाजपा विधायक शिव अरोरा ने ‘जनसंख्या नियंत्रण कानून’ लाने की मांग अपनी सरकार से की।
नीति निर्धारकों ने इस मांग का स्वागत किया तो विपक्ष ने इसे छोटी मानसिकता बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विषय पर और वैचारिक मंथन करने की जरूरत माना।
ऐसा प्रतीत होता है कि धामी सरकार, यू.सी.सी.और मदरसा बोर्ड खत्म करने की तर्ज पर ‘जनसंख्या नियंत्रण बिल’ लाकर एक नया प्रयोग करने पर विचार कर रही है। जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर न सिर्फ उत्तराखंड की राजनीति में बल्कि सामाजिक तौर पर भी बहस शुरू हो गई है।
विधायक शिव अरोरा ने विधानसभा में अपनी बात रखते हुए ध्यान दिलाया कि राज्य में वर्ग विशेष(मुस्लिम)की आबादी वर्ष 2011 में 14 प्रतिशत थी जोकि अब बढ़कर 18 फीसदी तक पहुंच गई है। शिव ने यू.पी.से लगे तराई के जिलों के साथ साथ पहाड़ के कुछ ऐसे क्षेत्रों का भी जिक्र किया जहां मुस्लिम आबादी अत्यधिक तेजी से बड़ी है।
उन्होंने, विशेष समुदाय के “हम पांच हमारे पच्चीस” के अभियान को देवभूमि उत्तराखंड के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि राज्य के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, लिहाजा यहां जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाए।
कहा कि तीन से अधिक बच्चे वालों को सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाए। उन्होंने ये भी कहा की गैस, मकान, राशन जैसी सब्सिडी वाली सुविधाएं वर्ग विशेष को मिलने से उत्तराखंड राज्य सरकार का बजट बिगड़ रहा है।सी.एम.पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में अपने विधायक द्वारा जनसंख्या नियंत्रण कानून को उनका निजी विचार और मांग बताया।
कहा कि अभी इसपर और वैचारिक मंथन करने की जरूरत है।, डेमोग्राफी चेंज, उत्तराखंड की समस्या है और हमारी सरकार इसपर सजग होकर काम भी कर रही है। हम उत्तराखंड की देव स्वरूप सांस्कृतिक और स्वच्छ वातावरण को बनाए रखने के लिए वचनबद्ध हैं। हम अपने बच्चों को सांस्कृतिक रूप से एक मजबूत उत्तराखंड देने का संकल्प लिए हैं।
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