बड़ी खबर: रोहडू में नाबालिग दलित बच्चे की आत्महत्या मामले में एएसआई निलंबित  – पर्वतजन

रोहडू (शिमला): नीरज उत्तराखंडी 
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहडू उपमंडल में 12 वर्षीय दलित बच्चे की आत्महत्या मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस संवेदनशील मामले में कार्रवाई में देरी और लापरवाही बरतने पर अब पुलिस पर गाज गिरी है।
अनुसूचित जाति आयोग की फटकार के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि जांच अधिकारी एएसआई को निलंबित कर दिया गया है।

आयोग ने दिखाई सख्ती
हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार ने इस मामले में तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई थी। आयोग ने डीएसपी रोहडू की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनसे स्पष्टीकरण (explanation) भी मांगा है।
देरी से दर्ज हुआ मुकदमा
मामला तब गंभीर हुआ जब यह हाई कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट के निर्देशों के बाद ही पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST) अधिनियम 1989 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। इससे पहले 20 सितंबर को दर्ज हुई एफआईआर में अधिनियम की धाराएं नहीं जोड़ी गई थीं, जिससे जांच की दिशा बदल गई थी।
आयोग ने रिपोर्ट तलब की
कुलदीप कुमार ने बताया कि आयोग ने 14 अक्तूबर, 2025 को डीजीपी कार्यालय से रिपोर्ट प्राप्त की है। इससे पहले 8 अक्तूबर को एसडीपीओ रोहडू से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन समय पर नहीं दी गई। इसके बाद आयोग ने मामले का पूरा संज्ञान लेते हुए आरोपी महिला की गिरफ्तारी और एएसआई के निलंबन के आदेश दिए।
जातीय भेदभाव का मामला
पीड़ित परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपी महिला ने उनके बच्चे को घर में प्रवेश करने से रोका और उसे “अछूत” कहा।
साथ ही, कथित रूप से घर की “शुद्धि” के लिए बकरा मांगने की बात भी कही गई थी। इस सामाजिक अपमान और मानसिक उत्पीड़न के बाद बच्चे ने आत्महत्या कर ली थी।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा खतरा है, इसलिए पुलिस को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग इस मामले की हर गतिविधि पर निगरानी बनाए रखेगा।
एसएसपी शिमला का बयान
एसएसपी शिमला संजीव गांधी ने पुष्टि की कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
सामाजिक सोच पर उठे सवाल
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि हिमाचल जैसे विकसित राज्य की सामाजिक स्थिति पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
जहां आर्थिक रूप से समृद्ध राज्य माने जाने वाले हिमाचल में आज भी जातीय भेदभाव और कुरीतियां किसी मासूम की जान ले रही हैं।

Sapna Rani

Recent Posts

एमडीडीए का बड़ा एक्शन- पांच जगह सीलिंग, आवासीय कॉलोनियों में अवैध कारोबार पर चला डंडा

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में प्राधिकरण की सख्ती, बिना नक्शे दुकानें बनाने और…

6 minutes ago

अनुपूरक बजट हो सकता है पास, छठे राज्य वित्त आयोग पर मिलेगी अच्छी खबर – myuttarakhandnews.com

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की अहम बैठक 22 अक्टूबर को होगी।…

13 minutes ago

ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान को देहरादून जिला प्रशासन की अनूठी पहल ‘रात्रि चौपाल’ शुरू

सीडीओ अभिनव शाह की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत थेवा, मालदेवता में आयोजित हुई पहली रात्रि…

27 minutes ago

बढ़ सकती है उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति की मुश्किलें, बयानों की तस्दीक में जुटी SIT – myuttarakhandnews.com

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद के मामले…

55 minutes ago

दिन और रात में 15 डिग्री का अंतर; उत्तराखंड में बढ़ने लगी ठंड, अगले 7 दिन कैसा रहेगा मौसम? – myuttarakhandnews.com

दिन में चटख धूप, जबकि सुबह-शाम ठंड का अहसास। राजधानी देहरादून में मौसम का यह…

2 hours ago

200 हथियार और 151 तलवारें, BJP विधायक बृजभूषण राजपूत ने किया शस्त्र पूजन – myuttarakhandnews.com

महोबा की चरखारी सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक बृजभूषण राजपूत ने विजयदशमी पर्व…

2 hours ago