नैनीताल। प्रदेश में भूस्खलन व भू धंसाव से नदियों सहित आसपास के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर ढांचागत नुकसान हुआ है। शासन की ओर से उपचार कार्यों से पहले उत्तरकाशी, नैनीताल व चमोली जिले के वैज्ञानिक अध्ययन का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद ही ट्रीटमेंट कार्यों की डीपीआर तैयार की जाएगी। सिंचाई विभाग की ओर से विशेषज्ञ संस्थाओं की अध्ययन रिपोर्ट के बाद ही नदियों का चैनलाइजेशन किया जाएगा। नैनीताल में झील के चारों ओर की सुरक्षा दीवारों सहित आसपास की पहाड़ियों का भी वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रीटमेंट किया जाएगा।
नैनीताल पहुंचे सिंचाई सचिव युगल किशोर पंत ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कहा कि इस बार आपदा से नदियों को भी खासा नुकसान हुआ है। नदी में सील्ट व गाद जमा हो गई है। जिससे नदी का चैनल बदल गया है। प्रदेश में नदियों का आइआइटी रुड़की, एफआरआइ, एनआइएच सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थानों की ओर से अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन रिपोर्ट के बाद ही नदियों का चैनलाइजेशन किया जाएगा।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नैनीताल की माल रोड व झील की सुरक्षा दीवारों के टिकाऊ ट्रीटमेंट के लिए भी वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। भू वैज्ञानिकों की टीम के साथ ही माल रोड के धंसाव सहित ऊपरी पहाड़ियों का निरीक्षण् किया गया है। विशेषज्ञों के सुझाव के बाद ही ट्रीटमेंट कार्य किए जाएंगे। जोड़ा कि सिंचाई नहरों को हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों के परीक्षण के बाद ही योजनाएं तैयार की जाती हैं।
नैनीताल से दूर बसाए जाएं छोटे शहरनैनीताल: प्रसिद्ध भू विज्ञानी प्रो.सीसी पंत ने साफ कहा है कि नैनीताल की धारण क्षमता समाप्त हो चुकी है, ऐसे में सरकार को नैनीताल से 20-25 किलोमीटर दूर पहाड़पानी, मोरनौला आदि क्षेत्रों में नया स्मार्ट शहर बसाना चाहिए। प्रो. पंत ने कहा कि नैनीताल का सात नंबर क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। क्षेत्र में चट्टानें कमजोर हैं। ऐसे में ड्रेनेज सिस्टम प्रोपर जरूरी है। उन्होंने कहा कि माल रोड सहित ऊपरी पहाड़ियां खिसक रही हैं। इस बार बारिश में नयना पीक पहाड़ी से दस से अधिक झरने बहते रहे, यह क्षेत्र संवेदनशील है। ऐसे में इन इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम बेहतर किया जाना चाहिए।
आपदा प्रबंधन राज्य की जिम्मेदारीनैनीताल: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर सूर्यप्रकाश गुप्ता का कहना है कि इस बार पूरे हिमालयी राज्यों हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर आपदा आई, जिसके व्यापक दुष्प्रभाव देखने को मिले। कहा कि उत्तराखंड अन्य राज्यों से अधिक प्रभावित रहा, जोड़ा कि भारत सरकार आपदा प्रबंधन के लिए राज्य को तकनीकी व आर्थिक सहयोग प्रदान करती है, आपदा प्रबंधन करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पहले जून 2009, फिर 2020 में भूस्खलन आपदा प्रबंधन को लेकर राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री की ओर से भी आपदा प्रबंधन के लिए दस सूत्रीय फार्मूला सुझाया गया है। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि आपदा इलाकों के स्थायी ट्रीटमेंट के लिए ठोस कार्ययोजना बनाए।
उत्तराखण्ड में एनसीसी के विस्तार एवं आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा…
देहरादून। प्रेमनगर क्षेत्र में पीजी और हॉस्टलों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की गतिविधियों पर नजर…
my uttarakhand news Bureau Dehradun, 19 Aug: A grand celebration of national pride, artistic expression,…
देहरादून। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एसटीएफ उत्तराखंड और औषधि प्रशासन विभाग ने संयुक्त…
my uttarakhand news Bureau Dehradun, 19 Aug: A meeting of the Road Safety Monitoring Committee was held…
my uttarakhand news Bureau Dehradun, 19 Aug: Governor Lt Gen (Retd) Gurmit Singh, addressing probationers…