देहरादून। इजराइल दौरे में प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी की पोशाक में शामिल होने से उत्तराखंड की ब्रह्मकमल टोपी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इससे पूर्व वर्ष 2022 के गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रह्मकमल पहाड़ी टोपी धारण की थी, तब से यह पहाड़ी टोपी देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी का देवभूमि उत्तराखंड से खास लगाव है और वह ब्रह्मकमल पहाड़ी टोपी के जरिये अपने जुड़ाव का संदेश अक्सर देते रहते हैं। इजराइल में पीएम मोदी के पहाड़ी ब्रह्मकमल टोपी को धारण करने से इसके डिजाइनर समीर शुक्ला बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि इस टोपी का निर्माण मसूरी में किया गया। वर्ष 2017 में उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस (नौ नवंबर) पर इसे औपचारिक रूप से लांच किया गया था। शुक्ला बताते हैं कि उन्होंने सभी हिमालयी राज्यों की यात्राओं के दौरान महसूस किया कि उत्तराखंड का अपना कोई सर्वमान्य पारंपरिक शीशवस्त्र नहीं है, जिसे देखकर यहां के स्थानीय व्यक्तियों को पहचाना जा सके।
इसी सोच के साथ उन्होंने ऐसी टोपी तैयार की, जो परंपरा और आधुनिकता का संगम हो।
ब्रह्मकमल पवित्रता और शुभता का प्रतीकटोपी में राज्य पुष्प ब्रह्मकमल का प्रतीक अंकित किया गया है। ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प और देवपुष्प है। केदारनाथ में भगवान शिव की पूजा में इस पुष्प का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने भोलेनाथ को एक हजार ब्रह्मकमल अर्पित किए थे, जिससे यह पुष्प पवित्रता और शुभ का प्रतीक बन गया। इसीलिए उन्होंने इस पवित्र चिह्न को टोपी में शामिल किया।
आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जर्मनी में भी मांगसमीर शुक्ला बताते हैं कि इस टोपी को उन्होंने छह रंगों में तैयार किया गया था और इन सभी रंगों की टोपी प्रधानमंत्री मोदी को भेजी गई थी, लेकिन सबसे पहले वर्ष 2017 में यह टोपी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पूर्व सीडीएस जनरल विपिन रावत को भेजी थी। उन्होंने बताया कि अब यह टोपी केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और दक्षिण भारत के कई राज्यों में लोकप्रिय है। आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों में भी इसकी मांग है। विदेशी शादी समारोहों में भी इसका प्रयोग किया जा रहा है।
कई राज्यों में बेरोजगारों को मिला रोजगारसमीर शुक्ला कहते हैं कि अन्य शहरों में लोग इसे बनाकर बेच रहे हैं और इससे रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं, तो यह राज्य के लिए गर्व की बात है। वर्तमान में इस टोपी से जुड़े कारीगरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है, जिससे आत्मनिर्भरता को भी बल मिला है। इजराइल में ब्रह्मकमल टोपी धारण कर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा को गौरवान्वित किया है। यह केवल एक टोपी नहीं, बल्कि देवभूमि की आस्था, पहचान और आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुकी है।’
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।
प्रधानमंत्री ने इजरायल दौरे पर सैन्यभूमि उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी पहनकर न केवल मातृभूमि के वीर सपूतों के प्रति सम्मान प्रकट किया, बल्कि विश्व मंच पर उत्तराखंड की गौरवशाली सैन्य परंपरा, शौर्य और योगदान को भी गर्व के साथ प्रदर्शित किया।-अनिल बलूनी, गढ़वाल सांसद
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