संकल्प विकसित उत्तराखंड@2047 पर विकास कॉन्क्लेव में मंथन –

देहरादून, । उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक विकसित, समावेशी, सतत और समृद्ध राज्य बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को लेकर  होटल रमाडा, चकराता रोड में “Uttarakhand Development Conclave: Sankalp – Viksit Uttarakhand@2047” का आयोजन किया गया। उत्तराखंड सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (CPPGG) एवं SRADSTA के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कॉन्क्लेव में विभिन्न सरकारी विभागों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने राज्य के विकास की दिशा पर मंथन किया। एमडीडीए, उत्तराखंड पर्यटन, एचआरडीए, ब्रिडकुल एवं आईटीडीए ने भी सक्रिय भागीदारी की।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने पूर्व रक्षा सचिव भारत सरकार डॉ. योगेंद्र नारायण, पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड एन. रविशंकर, पूर्व आईएएस डॉ. संजीव चोपड़ा सहित सचिवों एवं विभागाध्यक्षों का स्वागत किया।डॉ. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि विकसित राज्य की पहचान केवल आर्थिक वृद्धि से नहीं, बल्कि नागरिकों की आय, मजबूत अर्थव्यवस्था और जीवन की बेहतर गुणवत्ता से होती है।उन्होंने जनसांख्यिकीय लाभांश, प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगारपरक कौशल, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, कृषि के आधुनिकीकरण, उच्च मूल्य वाली एवं बाजार आधारित कृषि, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने तथा सुनियोजित शहरीकरण को प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक क्षेत्र में कार्यरत मानव संसाधन को विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा करने होंगे।विकास का लक्ष्य लोगों की खुशी हो : डॉ. योगेंद्र नारायणपूर्व रक्षा सचिव भारत सरकार डॉ. योगेंद्र नारायण ने ऑनलाइन माध्यम से कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उत्तराखंड की विरासत, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा और सामाजिक जवाबदेही को विकास की रणनीति में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत को विकास योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।उन्होंने ऐतिहासिक क्षेत्रों को पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कारोबार के अवसरों से जोड़ने, जल निकायों के पुनर्जीवन, जैव विविधता पार्कों को जोड़ने वाले हरित गलियारों के निर्माण तथा ऐतिहासिक आवासीय क्षेत्रों को संस्कृति और वाणिज्य से जोड़कर जीवंत बनाने की आवश्यकता बताई।डॉ. नारायण ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को इंटर्नशिप से जोड़ने और इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने होमस्टे योजना का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक करने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में भारी परिवहन व्यवस्था के विकल्प के रूप में रोपवे जैसी आधुनिक परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने की बात कही।उन्होंने कहा कि “विकास का अंतिम लक्ष्य लोगों की खुशी होनी चाहिए, केवल जीडीपी नहीं।” उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य की विकास नीतियों में नागरिकों की खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता को भी महत्वपूर्ण सूचक के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने पर जोरपूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर ने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के लिए स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों को अधिक सशक्त बनाना जरूरी है। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों के तहत विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए आवश्यकतानुसार विभागों के एकीकरण का सुझाव दिया।उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जनपद स्तर पर जिला योजना समिति गठित करने तथा मुख्य विकास अधिकारी को जिला पंचायत का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने का सुझाव दिया। इससे स्थानीय स्तर पर योजनाओं के बेहतर समन्वय और नियोजित विकास को गति मिलने की बात कही गई।तीन प्रमुख सत्रों में विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चाकॉन्क्लेव के प्रथम सत्र में पर्वतीय सड़क एवं सुरंग, शहरी विकास, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, रोपवे, मल्टी-मॉडल परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।द्वितीय सत्र में जलवायु-स्मार्ट कृषि एवं बागवानी, उच्च मूल्य वाली फसल विविधीकरण, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैल्यू चेन, बाजार संपर्क, ग्रामीण उद्यमिता तथा युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर विषयों पर चर्चा हुई।तृतीय सत्र में स्टार्टअप एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र, हिमालयी चुनौतियों के समाधान में तकनीकी नवाचार, कौशल विकास, ग्रामीण उद्यमिता तथा महिलाओं एवं युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।विशेषज्ञों ने दिए विकास के लिए सुझावकॉन्क्लेव में पूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर, पूर्व निदेशक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी डॉ. संजीव चोपड़ा, सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडे, सचिव पंचायती राज चन्द्रेश यादव, सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन दीपक कुमार, अपर सचिव नियोजन नरेंद्र भंडारी, सूचना महानिदेशक बंसीधर तिवारी, निदेशक आईटीडीए आलोक पांडेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।इसके अलावा नाबार्ड के सीजीएम पंकज यादव, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत, आईआईआरएस के निदेशक डॉ. आरपी सिंह, कैप के निदेशक डॉ. निपेंद्र चौहान, आईआईएम काशीपुर के प्रो. सफल बत्रा, सीआईआई की अध्यक्ष सोनिया गर्ग, हेरिटेज एविएशन के रोहित माथुर, एपीडा के सलाहकार एवं पूर्व बागवानी निदेशक डॉ. बीएस नेगी सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव रखे।कार्यक्रम का स्वागत भाषण अपर सचिव नियोजन नरेंद्र भंडारी ने दिया। कार्यक्रम का विवरण SRADSTA के अध्यक्ष डॉ. कुँवर राज अस्थाना ने प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन CPPGG के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मनोज कुमार पंत ने किया।उल्लेखनीय कार्यों के लिए ‘उत्तराखंड रतनश्री सम्मान’कॉन्क्लेव के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को 5वें IGSI उत्तराखंड रतनश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में राज्य बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. भानु दुग्गल, उत्तरांचल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. धर्म बुद्धि, जीआरडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनीष प्रतीक, उज्ज्वल के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह, मायादेवी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. तृप्ति सेमवाल, फिल्म विकास परिषद के एसीईओ केएस चौहान, एसटीपीआई के अपर निदेशक मनीष कुमार तथा सूचना विभाग के उपनिदेशक बद्री चंद नेगी शामिल रहे।सम्मान प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. अजय सक्सेना एवं चिन्मय मिशन की सचिव साधना जयराज ने संयुक्त रूप से प्रदान किए। कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय भागीदारी, रोजगार, शिक्षा, नवाचार और नागरिकों की खुशहाली को विकास की आधारशिला बनाने पर जोर दिया।

pooja Singh

Share
Published by
pooja Singh

Recent Posts

केदारनाथ धाम में धरने पर बैठे BKTC के कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी चेतावनी, जानिए क्यों? – myuttarakhandnews.com

कर्मचारियों ने मंगलवार से एक सप्ताह तक मंदिर केदारनाथ मंदिर प्रांगण में क्रमिक अनशन करने…

15 minutes ago

रुद्रपुर में कारोबारी रोहिताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा के आवासों पर 40 घंटे से जारी आयकर जांच – myuttarakhandnews.com

रुद्रपुर। कारोबारी रोहिताश बत्रा और डॉ. दीपक छाबड़ा के आवासों पर आयकर विभाग की कार्रवाई…

21 minutes ago

लक्सर में नकली पनीर बनाने वाली इकाई पर छापा, 90 किलो पनीर और 6 क्विंटल पामोलीन तेल नष्ट – myuttarakhandnews.com

लक्सर। नवरात्र और दीपावली के त्योहारों को देखते हुए खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के…

27 minutes ago

मोबाइल पर टोकने से आहत आठवीं की छात्रा ने की आत्महत्या, परिवार में मचा कोहराम – myuttarakhandnews.com

हल्द्वानी। उत्तराखंड के बिंदुखत्ता स्थित वेस्ट राजीवनगर में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 वर्षीय…

34 minutes ago

16 और 17 अक्टूबर को आयोजित होगा फिक्की फ्लो बाजार 2026 –

  देहरादून, : फिक्की फ्लो उत्तराखण्ड ने आज दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित प्रेस…

41 minutes ago