उनके सुख-दुख और समस्याएं जानी, विभाग को दिए निस्तारित करने के आदेश
देहरादून। रोजमर्रा की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं से अलग उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने वृद्धाश्रमों में रह रही माताओं के बीच समय बिताया। उन्होंने डालनवाला स्थित प्रेम धाम और अम्बीवाला स्थित मां गौरी ओल्ड एज होम पहुंचकर वहां रह रही महिलाओं से मुलाकात की और उनकी समस्याओं व जरूरतों को करीब से जाना।
मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि एक बेटी के रूप में इन माताओं के बीच भावनात्मक एवं अनुरागयुक्त समय व्यतीत करना मेरे लिए अत्यंत अनूठा अनुभव रहा। कई माताएं पारिवारिक उपेक्षा या अन्य कारणों से यहां रहने को विवश हैं। हमारा दायित्व है कि उनके जीवन को सम्मान, सुरक्षा और संबल प्रदान करें।
मुलाकात के दौरान महिलाओं ने बताया कि वृद्धावस्था के कारण उन्हें बार-बार चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन अस्पताल आने-जाने में सहयोग की कमी रहती है। इस पर मंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कुछ महिलाओं ने ग्राम पंचायत स्तर पर ओल्ड एज केयर होम स्थापित करने का सुझाव भी दिया, ताकि गांवों में रहने वाले बुजुर्ग एक स्थान पर एकत्र होकर आपसी संवाद के माध्यम से भावनात्मक संबल प्राप्त कर सकें। इस पर मंत्री ने अधिकारियों से प्रस्ताव का परीक्षण कर व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हम जल्द ही 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक समग्र योजना लाएंगे। साथ ही वृद्धाश्रमों में रह रही माताओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे अप्रिय स्मृतियों से दूर रहकर सकारात्मक वातावरण में जीवन व्यतीत कर सकें।
उन्होंने महिलाओं को आगामी महिला दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रमों में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि उन्हें कार्यक्रम ले जाने के लिए वह एक बस भेजेंगी और वही बस उन्हें छोड़ने भी आएगी।
इस अवसर पर राज्य परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी, आरती बलोदी, मीना बिष्ट, आशा कंडारी, सिस्टर अपर्णा, प्रतिभा बहुगुणा जोशी, अनीता बिष्ट, रेखा देवी, उषा देवी, रमेश लाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मंत्री के गले लगा कर फूट कर रो पड़ी महिलामां गौरी ओल्ड एज होम में जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या महिलाओं से उनके परिवार के बारे में बातचीत कर रही थी तो उषा देवी नाम की एक महिला मंत्री के गले लगा कर फूट फूट कर रो पड़ी। उसका कहना था कि उसके बेटे के निधन के बाद वह दुनिया में बिल्कुल अकेली रह गई है और परिवार के दूसरे लोग भी उनका साथ नहीं दे रहे हैं। इस पर कैबिनेट मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यहां उनके हर सुख दुख का ध्यान रखा जाएगा। वही प्रेम धाम में रह रही पूर्व अध्यापिका बीना एडवर्ड्स से जब कैबिनेट मंत्री ने पूछा कि वह उनसे और क्या उम्मीद करती है, तो बीना का कहना था कि बाकी सारी सुविधाएं तो मिल रही है लेकिन अपनेपन की बात करने वाला कोई नहीं मिलता, इसलिए आप यहां आते रहा करो।
काश बच्चे बड़े ना होते, छोटे ही रहते प्रेम धाम आश्रम में एक महिला से जब मंत्री ने पूछा कि उन्हें अपने अतीत से क्या शिकायत है। तो महिला ने बड़े दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया कि काश उनके बच्चे कभी बड़े ना होते और वह हमेशा छोटे ही रहते। महिला का कहना था कि बड़े होने के बाद बच्चे अपने-अपने परिवारों में व्यस्त हो गए और मां का ख्याल करना उन्होंने छोड़ दिया। इस पर मंत्री ने महिला से कहा कि यहां जितनी भी महिलाएं हैं उन्हें ही अपना परिवार समझिए और कोई समस्या हो तो महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग से कभी भी संपर्क किया जा सकता है।
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