वीर सैनिकों के सम्मान में झुकी राजधानी, जस्टिस राजेश टंडन बोले— देश सेवा सबसे बड़ा धर्म – my uttarakhand news

 
ऑपरेशन सिंदूर वीर सैनिक सम्मान समारोह में समाजसेवियों और पत्रकारों को किया गया सम्मानित
देहरादून। राजधानी के सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में  देशभक्ति, सेवा और सम्मान का अनूठा संगम देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित “ऑपरेशन सिंदूर वीर सैनिक सम्मान समारोह” में वीर सैनिकों, समाजसेवियों और पत्रकारों को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं की उपस्थिति रही।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति एवं एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक राजेश टंडन ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का सम्मान करना हर नागरिक का संवैधानिक और नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों के बलिदान की बदौलत ही देश सुरक्षित है और ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद डॉ. गीता खन्ना ने मानवाधिकारों की रक्षा और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बुलंद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं संदीप गुप्ता, के. जी. बहल तथा डॉ. सोनिया आनंद रावत ने सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग को देश की सबसे बड़ी प्रेरणा बताया।
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पत्रकारों और समाजसेवियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में देवभूमि पत्रकार यूनियन के प्रदेश महासचिव वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वी. डी. शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इसके अलावा संजय अग्रवाल, रवि पंवार, बी.पी. शर्मा, सूरजभान चौहान और सूर्यप्रकाश भट्ट समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार अकील खान ने कहा कि यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने का अभियान है। उन्होंने गुलिस्ता खानम, जी.एस. मिश्रा, इंजीनियर शाहिद और कृपाल सिंह नेगी सहित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
सम्मानित होने वालों में बृजेश नेगी, विश्वजीत कुमार सिंह, मोहम्मद फरीद, अशोक कुमार वर्मा और प्रदीप भंडारी प्रमुख रहे। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रसेवा के प्रति सामूहिक संकल्प लिया गया तथा भविष्य में ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की बात कही गई।
देहरादून की सैन्य परंपराओं और वीरभूमि उत्तराखंड की गौरवशाली संस्कृति को समर्पित इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देवभूमि अपने वीर जवानों के सम्मान में सदैव अग्रणी रही है।

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