
, देहरादून: राजपुर थाना क्षेत्र स्थित डोम गांव में करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य की जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कथित धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में देहरादून पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को दी गई शिकायत के आधार पर सरदार हरजिंदर पाल सिंह बंगा, परमीत सिंह उर्फ पम्मी और कुंवर जावेद राव के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता डॉ. नितिन कुमार गुप्ता के माध्यम से पीपल मंडी, देहरादून निवासी अंकित अग्रवाल द्वारा सौंपी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन के मूल स्वामी हरजिंदर पाल सिंह बंगा ने बैंक खातों के माध्यम से आरटीजीएस द्वारा भुगतान प्राप्त कर कई खरीदारों के पक्ष में जमीनों की रजिस्ट्रियां की थीं। आरोप है कि इसके बाद कुंवर जावेद राव के पक्ष में सामान्य मुख्तारनामा निष्पादित किया गया और उसी जमीन के दोबारा अन्य लोगों के पक्ष में सौदे किए गए। इससे कई खरीदारों के संपत्ति संबंधी अधिकारों पर विवाद उत्पन्न हो गया। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि अब उन पर अपनी खरीदी हुई जमीन वापस बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। *दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा में पहले से दर्ज है प्राथमिकी*इस प्रकरण में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, मंदिर मार्ग में पहले ही प्राथमिकी दर्ज होने की बात शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस मामले में लगभग 43 रजिस्ट्रियों और संबंधित खरीदारों का विवरण शामिल है तथा कुंवर जावेद राव को मुख्य आरोपी बनाया गया है। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि जमीन के मूल स्वामी और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की समुचित जांच के बिना कार्रवाई का दायरा सीमित रह सकता है। *देहरादून में जांच कराने की मांग*शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विवादित जमीनें, संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय के दस्तावेज, राजस्व अभिलेख, गवाह और अधिकांश खरीदार देहरादून जिले में ही स्थित हैं। शिकायत में खसरा संख्या 325, 343, 368 और 370 सहित अन्य भूमि अभिलेखों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि खरीदारों को दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा के समक्ष बार-बार उपस्थित होने में अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित खरीदारों ने मांग की है कि मामले में सभी संबंधित रजिस्ट्रियों, मुख्तारनामों, बैंक लेनदेन और राजस्व अभिलेखों की गहन जांच की जाए, ताकि जमीनों के कथित दोहरे सौदों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और प्रभावित खरीदारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब देहरादून पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनों की खरीद-फरोख्त, मुख्तारनामे के निष्पादन और बाद के कथित सौदों में संबंधित पक्षों की क्या भूमिका रही। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही हो सकेगी।


