आईएफएस संजीव चतुर्वेदी के एम्पैनलमेंट मामले में केंद्र का यू-टर्न: डीओपीटी ने कैट में दायर किया शपथपत्र – पर्वतजन

देहरादून/नई दिल्ली: भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के संयुक्त सचिव स्तर पर एम्पैनलमेंट न होने के मामले में केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपना रुख बदल लिया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में शपथपत्र दाखिल कर 14 अक्टूबर 2025 के अपने आदेश को वापस लेने की मांग की है। इस आदेश में कैट ने डीओपीटी को 360-डिग्री मूल्यांकन (मल्टी-सोर्स फीडबैक – एमएसएफ) की गाइडलाइंस रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था।
डीओपीटी का तर्क है कि ये गाइडलाइंस कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और ये सार्वजनिक डोमेन में नहीं हैं। विभाग ने कहा कि इन्हें अधिकतम गोपनीय या सीलबंद लिफाफे में ट्रिब्यूनल को दिखाया जा सकता है। यह कदम तब उठाया गया है जब कैट ने सीलबंद कवर में जमा गाइडलाइंस को वापस कर दिया था और इन्हें ठीक से रिकॉर्ड पर रखने को कहा था।
चतुर्वेदी के वकील सुदीर्शन गर्ग ने इस कदम को “केंद्र का एक और यू-टर्न” करार दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि अक्टूबर 2023 में डीओपीटी ने कैट में शपथपत्र दाखिल कर कहा था कि केंद्र सरकार में 360-डिग्री मूल्यांकन की कोई व्यवस्था ही नहीं है और इसलिए कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके आधार पर कैट ने मई 2024 में संबंधित याचिका को खारिज कर दिया था। लेकिन मई 2025 की सुनवाई में डीओपीटी के वकील ने रुख बदलते हुए एमएसएफ प्रावधानों का हवाला देकर दस्तावेज साझा करने से इनकार कर दिया।

यह मामला अपॉइंटमेंट कमिटी ऑफ कैबिनेट (एसीसी) के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का केंद्र में संयुक्त सचिव या समकक्ष स्तर पर एम्पैनलमेंट खारिज कर दिया गया था। चतुर्वेदी ने इसके खिलाफ कैट में याचिका दायर की थी और एम्पैनलमेंट प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों – जिसमें मूल्यांकन रिपोर्ट, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, सिविल सर्विस बोर्ड की सिफारिशें और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष शामिल हैं – की मांग की थी।
संजीव चतुर्वेदी भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दों पर अपनी मुखरता के लिए जाने जाते हैं और पहले भी कई मामलों में केंद्र से टकराव का सामना कर चुके हैं। इस नए शपथपत्र से वरिष्ठ स्तर पर एम्पैनलमेंट प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता के मुद्दे एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। मामले की अगली सुनवाई कैट में होने वाली है।

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