सड़क सुरक्षा को लेकर गठित अनुश्रवण समिति की बैठक
देहरादून। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए शासन ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को हुई सड़क सुरक्षा अनुश्रवण समिति की बैठक में दुर्घटनाओं के कारणों, ब्लैक स्पॉट, सड़क डिजाइन और जनपद स्तरीय सड़क सुरक्षा समितियों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
वैज्ञानिक तरीके से होगी हादसों की वजहों की जांच
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का केवल सामान्य आकलन करने के बजाय उनका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाना चाहिए। सड़क की डिजाइन, रोड ज्योमेट्री और तकनीकी खामियों की भी बारीकी से जांच हो। जिन स्थानों पर सड़क की संरचना या डिजाइन दुर्घटनाओं की वजह बन रही है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने रोड सेफ्टी ऑडिट को प्राथमिकता देने के साथ बस अड्डों का भी नियमित ऑडिट कराने के लिए टीम गठित करने को कहा। ऑडिट के दौरान सामने आने वाली कमियों और सुझावों पर संबंधित विभागों को गंभीरता से कार्रवाई करनी होगी।
हेलमेट और यातायात नियमों पर सख्ती
मुख्य सचिव ने दोपहिया वाहन चालकों और पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए हेलमेट के अनिवार्य इस्तेमाल को प्रभावी ढंग से लागू कराने के निर्देश दिए। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया।
उन्होंने परिवहन और पुलिस विभाग को प्रवर्तन कार्रवाई की नियमित समीक्षा करने तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
ब्लैक स्पॉट का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट
बैठक में ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां रोड सेफ्टी एवं थर्ड पार्टी ऑडिट कराने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने शेष ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्यों को भी तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
पर्वतीय क्षेत्रों में क्रैश बैरियर, पैराफिट और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर वन एवं लोक निर्माण विभाग की ओर से की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। साथ ही दूसरे राज्यों में अपनाई जा रही बेहतर सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें उत्तराखंड में लागू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया।
हर दो-तीन माह में चलेगा जागरूकता अभियान
मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियानों को महज औपचारिकता तक सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए। उन्होंने हर दो-तीन महीने में व्यापक स्तर पर अभियान चलाने और इसके लिए सालभर का प्रचार-प्रसार कैलेंडर तैयार करने को कहा।
पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग को दुर्घटना के बाद रेस्क्यू और त्वरित उपचार से संबंधित संयुक्त वर्कशॉप आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा स्थानीय सिनेमाघरों में सड़क सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता फिल्में प्रदर्शित कराने को कहा गया।
स्कूलों में बनेंगे सड़क सुरक्षा क्लब
शिक्षा और परिवहन विभाग के समन्वय से विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लब स्थापित कर उन्हें सक्रिय रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं के बीच यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने और हिट एंड रन के लंबित मामलों की सूची संबंधित जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में ऐसे मामलों की समीक्षा कर जल्द निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केवल यातायात नियमों का प्रवर्तन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सड़क इंजीनियरिंग, वाहनों की स्थिति, चालक के व्यवहार, जन-जागरूकता और दुर्घटना के बाद त्वरित उपचार—सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा।
बैठक में सचिव रविनाथ रमन, डॉ. रणवीर सिंह चौहान समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी मौजूद रहे।
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