चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से सटे पुलना-भ्यूंडार जंगल में लगी आग अब गंभीर रूप ले चुकी है। बीते कई दिनों से धधक रही इस आग पर काबू पाने में वन विभाग की टीमें नाकाम रही हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अब आग बुझाने की उम्मीद केवल बारिश, बर्फबारी या फिर हवाई मदद से ही बची है। हालात की गंभीरता को देखते हुए शासन-प्रशासन भी सतर्क हो गया है और क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है।
हेलिकॉप्टर से की गई रेकी, ऊपर से पानी छिड़काव पर विचार
मंगलवार को आग की स्थिति का आकलन करने के लिए हेलिकॉप्टर से इलाके की रेकी कराई गई। इस दौरान ऊपर से पानी छिड़काव की संभावनाएं भी तलाशी गईं। साथ ही सेटेलाइट इमेज के जरिए आग के फैलाव पर नजर रखी जा रही है।
15 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत फूलों की घाटी रेंज में पुलना-भ्यूंडार के सामने वाली पहाड़ी पर नौ जनवरी से आग लगी हुई है। वन विभाग की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन खड़ी चट्टानों और कठिन भूगोल के कारण मौके तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है। सेटेलाइट तस्वीरों के अनुसार करीब 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है।
3500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर लगी आग, चुनौतियां बढ़ीं
वन संरक्षक आकाश वर्मा ने बताया कि आग 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले जंगल में लगी है। यह इलाका बेहद दुर्गम है, जहां पाला, धुंध और ठंड भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जंगल पूरी तरह सूखा है, जिससे आग तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। आग को अन्य क्षेत्रों तक फैलने से रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पहले यूकाडा, फिर जरूरत पड़ी तो वायुसेना की मदद
वनाग्नि को लेकर शासन स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें अब तक किए गए प्रयासों की समीक्षा की गई। मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि नियंत्रण) सुशांत पटनायक ने बताया कि पहले यूकाडा के हेलिकॉप्टर से आग बुझाने का प्रयास किया जाएगा। यदि इससे सफलता नहीं मिलती है, तो वायुसेना की मदद भी ली जाएगी।
फिलहाल प्रशासन और वन विभाग की नजरें मौसम पर टिकी हैं, क्योंकि बारिश या बर्फबारी से ही इस विकराल आग पर स्थायी रूप से काबू पाया जा सकता है।
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