बैंक खाते से लेकर बीमा पॉलिसी तक, डेटा के दम पर हो रही ठगी
रुड़की। साइबर अपराधी अब लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। सरकारी विभागों, बैंकों, बीमा कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग कर ठग आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा लीक और साइबर सेंधमारी की घटनाएं बढ़ने से लोगों की निजी जानकारी अपराधियों तक पहुंच रही है, जिसका फायदा उठाकर वे भरोसा जीतने और ठगी को अंजाम देने में सफल हो रहे हैं।
हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें साइबर अपराधियों ने पीड़ितों की निजी और गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर उन्हें झांसे में लिया। ठग खुद को बैंक, बीमा कंपनी या सरकारी विभाग का कर्मचारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। जब वे पीड़ित की सही जानकारी बताते हैं तो लोग उन्हें असली प्रतिनिधि समझ लेते हैं और ओटीपी, बैंक डिटेल्स या अन्य गोपनीय जानकारी साझा कर बैठते हैं।
मुंडाखेड़ा खुर्द गांव में साइबर ठगों ने बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए आवेदन करने वाले लोगों का डेटा हासिल कर 15 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बनाया। इस मामले में पीड़ितों के खातों से डेढ़ लाख रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई।
एक अन्य मामले में नगर के एक व्यापारी को बीमा पॉलिसी की जानकारी का हवाला देकर ठगों ने किस्त जमा कराने के नाम पर 25 हजार रुपये से अधिक की ठगी कर ली। वहीं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले एक ग्राहक को ऑर्डर रद्द कराने का झांसा देकर उसके क्रेडिट कार्ड से 1.13 लाख रुपये निकाल लिए गए।
खेड़ी गांव के एक ग्रामीण के साथ भी इसी तरह की वारदात हुई। खुद को बैंक कर्मचारी बताने वाले साइबर ठग ने खाते से जुड़ी जानकारी हासिल कर 1.72 लाख रुपये की रकम उड़ा दी।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी डेटा हासिल करने के लिए हैकिंग, फर्जी लिंक, मैलवेयर और अंदरूनी स्रोतों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।
सुरक्षा के लिए बरतें ये सावधानियां
बैंकिंग और बीमा संबंधी कार्य केवल अधिकृत कार्यालय या प्रतिनिधि के माध्यम से कराएं।किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, सीवीवी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।अनजान लिंक, ईमेल और मोबाइल एप्लिकेशन से दूरी बनाए रखें।ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल विश्वसनीय और सुरक्षित वेबसाइटों का उपयोग करें।बैंकिंग वेबसाइट का यूआरएल स्वयं टाइप कर लॉगिन करें, किसी लिंक के जरिए नहीं।किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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