देहरादून दुष्कर्म मामला: सबूतों की कमी और जांच में खामियों के चलते विदेशी छात्र बरी – पर्वतजन

देहरादून की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की अदालत ने एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़े दुष्कर्म मामले में अहम फैसला सुनाते हुए विदेशी छात्र को दोषमुक्त कर दिया। यह प्रकरण अक्टूबर 2024 का है, जो दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज हुआ था और बाद में जांच के लिए देहरादून पुलिस को स्थानांतरित किया गया था।
 
मामले में दक्षिण अफ्रीका की एक छात्रा ने आरोप लगाया था कि वह देहरादून के एक निजी कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रही थी। 29 अक्टूबर 2024 की रात क्लेमेंटाउन थाना क्षेत्र में आयोजित एक फेयरवेल पार्टी में वह अपने संस्थान के अन्य छात्रों के साथ शामिल हुई थी। पार्टी के बाद वह अपने कमरे में सोने चली गई थी। छात्रा का आरोप था कि इसी दौरान दक्षिण सूडान के एक छात्र ने उसकी असहाय अवस्था का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

 
घटना के अगले दिन छात्रा दिल्ली एक इंटरव्यू के लिए गई, जहां उसने कश्मीरी गेट थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद मामला जांच के लिए देहरादून के आईएसबीटी चौकी क्षेत्र को भेजा गया।
 
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि पार्टी में उसने और उसके साथियों ने शराब का सेवन किया था और नशे की हालत में उसे यह स्पष्ट रूप से याद नहीं है कि किसने और कब उसे छुआ। मामले में पार्टी में मौजूद अन्य विदेशी छात्रों की गवाही भी दर्ज की गई, जिन्होंने बताया कि आरोपी और पीड़िता उस रात अलग-अलग कमरों में सोए थे।
 
एक अन्य छात्र ने अदालत को बताया कि रात में पीड़िता के चीखने जैसी आवाज सुनाई दी थी, लेकिन उसे आशंका थी कि वह किसी बुरे सपने के कारण जागी होगी। जब वह उसके कमरे में गया, तो वहां आरोपी मौजूद नहीं था। इन बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष के आरोप निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं हो पाए।
 
अभियोजन अधिवक्ता किशोर रावत के अनुसार, अदालत ने अपने फैसले में जांच अधिकारी की भूमिका पर भी गंभीर टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि क्लेमेंटाउन थाने में तैनात तत्कालीन जांच अधिकारी, सब इंस्पेक्टर संजीत कुमार ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्र करने में लापरवाही बरती। पीड़िता के आरोपों की प्रकृति को देखते हुए बिस्तर की चादर और कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किया जाना चाहिए था, लेकिन यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
 
सभी पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने दक्षिण सूडान के छात्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह फैसला एक बार फिर जांच की गुणवत्ता और साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है।

Sapna Rani

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