राजधानी में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के नाम पर भारी निवेश हासिल करके अचानक गायब हुए बिल्डर शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी गर्ग के खिलाफ अब कार्रवाई तेज़ हो गई है। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने दोनों के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं, जिससे उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सभी संभावनाएँ तत्काल समाप्त हो गई हैं।
दो बार नोटिस भेजने के बाद भी नहीं दिया जवाब
निवेशकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की समीक्षा करते हुए पासपोर्ट विभाग ने सबसे पहले शाश्वत और साक्षी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। समय सीमा पूरी होने पर रिमाइंडर भी भेजा गया, लेकिन दोनों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। मामले की गंभीरता और सार्वजनिक हित को देखते हुए विभाग ने दोनों के पासपोर्ट को अमान्य घोषित कर दिया।
17 अक्टूबर से पूरा परिवार लापता
शाश्वत, उनकी पत्नी, बेटा रिद्वान, पिता प्रवीण गर्ग और मां अंजली—सभी 17 अक्टूबर से गायब हैं। परिवार को आखिरी बार हापुड़ में साक्षी के भाई सुलभ गोयल के घर पर देखा गया था। इसके बाद सभी के मोबाइल फोन बंद हो गए और लोकेशन से जुड़ा कोई सुराग नहीं मिला।
गायब होने के बाद इंपीरियल वैली के निवेशकों—अर्चितमान शर्मा, रितेश धीमान, रोहित कौशिक और नीरज कुमार—ने पासपोर्ट ऑफिस में शिकायत दी। बाद में आर्केडिया हिलाक्स के 12 और निवेशक भी आगे आए।
एफआईआर और रेरा की सख्ती
आर्केडिया हिलाक्स प्रोजेक्ट में 21 से ज्यादा यूनिट्स के आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों पर पुलिस ने शाश्वत गर्ग परिवार और उनके कई सहयोगियों, यहां तक कि कुछ बैंक व वित्तीय संस्थानों को भी नामजद करते हुए मामला दर्ज कर लिया है।
साथ ही रेरा ने एक शिकायत के आधार पर इंपीरियल वैली प्रोजेक्ट में खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी है।
मुंबई के रास्ते नेपाल जाने की पुष्टि जैसे संकेत
जांच से सामने आया है कि शाश्वत और साक्षी ने 22 अक्टूबर को मुंबई से रॉयल नेपाल एयरलाइंस (RA-202) की फ्लाइट पकड़कर काठमांडू की यात्रा की थी। यह उड़ान उनके घर से गायब होने के कुछ ही दिन बाद की बताई गई है। दीपावली से पहले उनके वापस लौटने की उम्मीद थी, लेकिन इसके विपरीत वे उत्तराखंड छोड़कर नेपाल पहुंचे।
एनओसी होल्ड होने से नेपाल में ही फंसे होने की संभावना
भारत और नेपाल के बीच विशेष व्यवस्था के तहत किसी भारतीय को नेपाल से किसी तीसरे देश में जाने के लिए एनओसी चाहिए होती है। बताया गया है कि शाश्वत गर्ग की एनओसी रोक दी गई है, जिससे आगे किसी अन्य देश में जाने की उनकी कोशिश असंभव हो गई है। इस बीच कोई रिकॉर्ड यह नहीं दर्शाता कि वे नेपाल से बाहर गए हों या भारत लौटे हों।
सीमा चौकियों और एजेंसियों को पहले ही अलर्ट पर रखा गया है।
काठमांडू के होटलों तक पहुंची तलाश, निवेशक खुद गए नेपाल
निवेशकों ने अपनी ओर से भी खोज शुरू की। काठमांडू के कई बड़े होटलों में फोन करके शाश्वत के नाम पर कमरे की जानकारी मांगी गई।
मैरियट होटल में पहले कॉल ट्रांसफर का संकेत मिला, लेकिन बाद में बताया गया कि कमरे में कोई रिस्पॉन्स नहीं है।
कुछ निवेशक सीधे नेपाल पहुंचे और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर जांच की, लेकिन किसी भी होटल में गर्ग परिवार की मौजूदगी का रिकॉर्ड नहीं मिला।
कानूनी शिकंजा और सख्त होता दिख रहा है
पासपोर्ट निरस्तीकरण, आपराधिक मामला, रेरा की रोक और सीमा सतर्कता—इन सभी कदमों के बाद शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो चुके हैं।
निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही जांच एजेंसियां उनकी लोकेशन का पता लगाकर निवेश की गई रकम से जुड़ी सच्चाई सामने लाएंगी।
यह मामला अब साधारण धोखाधड़ी से ऊपर उठकर एक बड़े वित्तीय अपराध और फरारी का उदाहरण बन चुका है।
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