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उत्तराखंड में फिर उठने लगी 11 नए जिले बनाने की मांग, डिमांड पूरी ना होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी – myuttarakhandnews.com

देहरादून: उत्तराखंड राज्य में नए जिलों के गठन की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति उत्तराखंड ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है. समिति के पदाधिकारियों ने चेताया कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो उन्हें आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. समिति के संयोजक प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में विकास की गति को बेहतर बनाने के लिए, राज्य से पलायन रोकने के लिये व बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किए जाने के लिए ग्यारह और नए जिले बनने बेहद जरूरी हैं.
उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों को नए जिलों के रूप में गठित करने की मांग को लेकर प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि उत्तराखंड में नए जिले न बनने के कारण ढेर सारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं. इन्हीं समस्याओं का समाधान करने के लिए ही ग्यारह और नए जिले बनने चाहिए और सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा . उन्होंने कहा कि इसके लिए एक अभियान तेजी के साथ चलाया जाएगा. समिति के अनुसार, राज्य के कई दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आज भी विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है. प्रशासनिक दूरी और संसाधनों के असमान वितरण के कारण आम जनता को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
समिति का कहना है कि यदि नए जिलों का गठन किया जाता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी सुविधाएं भी आम जनता तक आसानी से पहुंच सकेगी.साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नए जिलों में उत्तरकाशी से पुरोला, नौगांव, मोरी क्षेत्र, टिहरी से नरेंद्र नगर,प्रतापनगर; पौड़ी से कोटद्वार,बीरोंखाल; चमोली जनपद से गैरसैंण, नैनीताल से हल्द्वानी,रामनगर के साथ ही हरिद्वार से रुड़की, देहरादून ज़िले से विकासनगर,चकराता, अल्मोड़ा से रानीखेत, पिथौरागढ़ से डीडीहाट तथा उधमसिंहनगर से काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र शामिल हैं. समिति के संयोजक प्रकाश कुमार डबराल ने यह भी कहा कि नए जिलों के गठन से युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा.
इसके अलावा भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और आपदा जैसी परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किए जा सकेंगे. समिति ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि शीघ्र ही नए जिलों के गठन की प्रक्रिया को अमल में लाया जाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो समिति आंदोलन तेज करने को मजबूर हो जाएगी.

Nandni sharma

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