ऋषिकेश, : जलवायु परिवर्तन अब बच्चों के रोज़मर्रा के जीवन को लगातार प्रभावित कर रहा है। अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी से लेकर बाढ़ और खराब साफ-सफाई जैसी चुनौतियां बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर बुरा असर डाल रही हैं। इससे उनकी स्कूली शिक्षा में रुकावट आ रही है और उनके सीखने व आगे बढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
वैश्विक स्तर पर, लगभग 1 बिलियन बच्चे जलवायु के बेहद गंभीर जोखिम का सामना कर रहे हैं। अकेले भारत में, हर साल अनुमानित 24 मिलियन बच्चे जलवायु से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों से प्रभावित होते हैं।
इस बात को समझते हुए, दुनिया की बेहतरीन स्वास्थ्य और स्वच्छता कंपनी, रेकिट ने अपने प्रमुख अभियान ‘डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया’ के तहत, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में ‘डेटॉल क्लाइमेट रेजिलीनिएंट स्कूल्स’ (डीसीआरएस) यानी जलवायु-अनुकूल स्कूल कार्यक्रम की शुरुआत की। यह पहल भारत सरकार के ‘मिशन लाइफ’ (लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट) के अनुरूप स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए रेकिट की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस पहल के हिस्से के रूप में, रेकिट ने चार धाम क्षेत्र, उत्तरकाशी में गंगोत्री और यमुनोत्री, रुद्रप्रयाग में केदारनाथ और बद्रीनाथ में जलवायु-अनुकूल स्कूल स्थापित किए हैं। यह कार्यक्रम तीन मुख्य स्तंभों – कैंपस, सहयोग और पाठ्यक्रम पर आधारित है। यह बच्चों को पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाने के लिए स्कूल के बुनियादी ढांचे, साझेदारियों और शैक्षिक सामग्री में जलवायु अनुकूलन को जोड़ता है।
इस पहल के प्रभाव को समझने के लिए, एम्स ऋषिकेश द्वारा क्षेत्र के चार जलवायु-अनुकूल स्कूलों और नौ सामान्य स्कूलों में एक मूल्यांकन किया गया।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्षों से बेहद मजबूत और स्पष्ट सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं, जो इस प्रकार हैं:
• बेहतर स्वच्छता आदतें: अधिक छात्रों ने अपने स्वच्छता व्यवहार में सुधार दिखाया और हाथ धोने के नियमों का बेहतर पालन किया।
• साबुन का अधिक उपयोग: स्कूलों में 94.1% छात्र साबुन और पानी से हाथ धोते हुए पाए गए।
• बढ़ी हुई जागरूकता: छात्रों में हाथ धोने के सही तरीकों और स्वच्छता के नियमों के प्रति बेहतर समझ देखी गई।
• स्वस्थ जीवन: 14.3% छात्रों ने जीवन की स्वास्थ्य-संबंधी गुणवत्ता को औसत से बेहतर बताया।
• लगातार उपस्थिति: जलवायु-अनुकूल स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति लगातार अच्छी रही, जिससे उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आई।
• इंफेक्शन के शून्य मामले: इन विशेष स्कूलों के छात्रों में किसी भी तरह का बैक्टीरियल या पैरासिटिक इंफेक्शन नहीं पाया गया।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना ने कहा, “हमारे मूल्यांकन में उत्तराखंड के 13 सरकारी स्कूलों का अध्ययन किया गया, जिनमें चार डेटॉल जलवायु अनुकूल स्कूल और 9 सामान्य स्कूल शामिल थे। निष्कर्ष बताते हैं कि जिन स्कूलों में यह कार्यक्रम चलाया गया, वहां के छात्रों ने हाथ की स्वच्छता के प्रति अधिक जागरूकता दिखाई, वे सुरक्षित पानी और पानी से होने वाली बीमारियों के बारे में अधिक जानते थे। साथ ही, उन्हें साफ पानी, बेहतर शौचालय सुविधाओं और अन्य जलवायु-अनुकूल उपायों का लाभ मिला। हमने छात्रों के स्वास्थ्य और उनके समग्र कल्याण में भी सकारात्मक सुधार देखा। यह अध्ययन बताता है कि डेटॉल जलवायु अनुकूल स्कूलों के तहत किए गए प्रयासों ने एक ऐसा स्कूली माहौल बनाने में मदद की है जो बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है और उनके सीखने के अवसरों को बढ़ाता है। हमने पाया कि बच्चे इन आदतों को न केवल स्कूलों में अपना रहे थे, बल्कि अपने परिवारों और समुदायों के साथ भी साझा कर रहे थे, जिसका मतलब है कि इसका असर क्लासरूम से बाहर तक फैल रहा है।”
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