नोएडा: देश के कई हिस्सों में रविवार को मानसून की बारिश जारी रही। जम्मू-कश्मीर में बादल फटा, हिमाचल प्रदेश में आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई। इसके अलावा उत्तराखंड में भूस्खलन और बारिश से सैकड़ों सड़कें बंद हो गईं। उत्तराखंड सबसे अधिक प्रभावित हुआ, जहां कई जिलों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने, नदियों का जलस्तर बढ़ने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में अगले 24 घंटे में भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मानसून को सक्रिय रखने वाला सिस्टम कमजोर पड़ामौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, देश के 70% हिस्से से मानसून के बादल गायब होने के पीछे सबसे बड़ी वजह मानसून को सक्रिय रखने वाले सिस्टम का कमजोर पड़ना है। 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बना, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसकी वजह से मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बादल और बारिश की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। फिलहाल बारिश मुख्य रूप से उत्तर भारत, पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर तक सीमित है। आईएमडी का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के फिर से एक्टिव होने की संभावना कम है। विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में 3 नए सिस्टम बन रहे हैं, अगर इनमें से एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गया तो मानसून फिर से एक्टिव हो सकता है।
उत्तराखंड में ऋषिकेश-यमुनोत्री हाईवे सहित 100 सड़कें बंदउत्तराखंड में बारिश के बाद सड़कों पर जगह-जगह पत्थर गिरने और मलबा आने से 100 सड़के बंद हैं। इसमें अधिकतर सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून में 10 ग्रामीण मार्ग बंद हैं। बंद रास्तों को खोलने का प्रयास किया जा रहा है।
अल्मोड़ा में पांच, रुद्रप्रयाग में चार, चमोली में 12, पिथौरागढ़ में 14 सड़कें बंद हैं। नैनीताल में हल्द्वानी-भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामगढ़ पुल के पास मार्ग धसने से भारी वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। इस जिले में दो ग्रामीण सड़कें भी बंद हैं। उत्तरकाशी में ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्यानाचट्टी के पास बंद हैं। इस जिले में 10 ग्रामीण मार्ग भी मलबा आने से बंद हैं। इसके अलावा टिहरी जिले के नौ ग्रामीण मार्गों पर भी जगह-जगह मलबा आ गया है। जिससे मार्ग बंद हैं। उधर मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से सोमवार को प्रदेश के पर्वतीय जिलों के कुछ इलाकों में भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है।
कश्मीर के अवूरा में बादल फटने से तबाही, कई घरों में अब भी भरा है पानीअनंतनाग जिले के पहलगाम के अवूरा इलाके में शनिवार रात को बादल फटने के बाद तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। सैलाब के कारण कई घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है। कुछ मकान आंशिक रूप से ध्वस्त हो गए हैं जबकि कई कमरों में अब भी पानी जमा है।
प्रभावित परिवार अपने घरों से सामान निकालने और सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश में जुटे हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रहा है और राहत कार्य जारी हैं। स्थानीय निवासी गुलाम हसन ने घटना को याद करते हुए बताया, अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। मैंने तुरंत अपने बच्चों को घर से बाहर निकाला। कुछ ही देर बाद एक बड़ा पेड़ सीधे मेरे घर पर आ गिरा। रात का भयावह मंजर अब भी आंखों के सामने ताजा है।
एक बुजुर्ग निवासी ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में अवूरा में इससे पहले इतना भयावह बादल फटना कभी नहीं देखा। उनके अनुसार, तेज बहाव ने कई स्थानों पर भारी नुकसान पहुंचाया और लोग दहशत में आ गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बादल फटने के बाद पूरे इलाके की तस्वीर बदल गई है। कई मकानों में अब भी कीचड़ और पानी भरा हुआ है जबकि लोग अपने टूटे-फूटे घरों को देखकर सदमे में हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की है।
अवूरा-बिजबिहाड़ा सड़क क्षतिग्रस्त, यातायात प्रभावितपहलगाम के अवूरा क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद पहलगाम-अवूरा-बिजबिहाड़ा सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सड़क के कई हिस्सों में मलबा और तेज बहाव के कारण आवाजाही बाधित हो गई है।
घटना के चलते इलाके में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई है जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने प्रभावित होटलों में ठहरे पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से क्षतिग्रस्त सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बहाली का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाए ताकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को हो रही परेशानियों से जल्द राहत मिल सके।शिमला समेत कई जिलों में बारि
श; रोहतांग में गिरी बर्फ, दो एनएच और 120 से ज्यादा सड़कें हुईं बंदहिमाचल प्रदेश में रविवार को शिमला, लाहौल-स्पीति, चंबा, सिरमौर और कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश हुई, जबकि रोहतांग में बर्फबारी हुई। भूस्खलन से पठानकोट-भरमौर और शिमला-रामपुर नेशनल हाईवे-5 समेत 120 से ज्यादा सड़कें बंद हैं। कुल्लू जिले में सैंज-न्यूली मार्ग भी भूस्खलन के कारण छह घंटे तक बाधित रहा।
ऊना में सड़क पर पेड़ गिरने यातायात थम गया, जबकि हमीरपुर में बिजली के तार टूटने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। धर्मशाला में दिन के समय घनी धुंध छाने से दृश्यता कम हो गई, जिससे वाहन चालकों को लाइट जलाकर सफर करना पड़ा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 18 जुलाई तक हल्की बारिश का पूर्वानुमान है।
रविवार दोपहर को शिमला में झमाझम बारिश हुई। चंबा जिले में भी दिन भर हल्की बारिश होती रही, जिससे मौसम सुहाना बना रहा। बारिश के बीच बत्ती दी हट्टी के समीप हुए भूस्खलन से पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहा, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। लाहौल घाटी में दोपहर बाद बारिश हुई और रोहतांग दर्रे पर बर्फ के फाहे गिरने से मौसम और ठंडा हो गया।
कुल्लू जिले के बंजार, बाह्य सराज और मनाली में सुबह से रुक-रुक कर बारिश होती रही। लगातार बारिश से बागवानों को प्लम और नाशपाती के तुड़ान में भी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। मंडी के जोगिंद्रनगर में सर्वाधिक छह सेंटीमीटर बारिश हुई। मनाली में पांच सेंटीमीटर और सराहन में चार सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। जिला सिरमौर में रविवार को भी विभिन्न क्षेत्रों में बारिश हुई। जिले में 9 सड़कें बंद रही। शाम को किन्नौर जिले के रल्ली में लाल ढांक में पहाड़ी से भारी-भरकम चट्टानें गिरीं। नेशनल हाईवे-5 बाधित होने से किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ सहित पूह, काजा और स्पीति वैली का संपर्क कट गया है।
सुंदरनगर में अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसून ट्रफ के प्रभाव से 16 जुलाई तक राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। हालांकि, 13 से 18 जुलाई के बीच भारी बारिश की कोई बड़ी चेतावनी नहीं है। अगले चार-पांच दिनों में न्यूनतम तापमान स्थिर रहेगा। अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे दो से छह डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है।
दिल्ली-एनसीआरमौसम विज्ञान केंद्र ने स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए दिशा-निर्देश किए जारीभारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और मिट्टी धंसने की संभावना है। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। निचले इलाकों में जलभराव और सड़कों पर फिसलन के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। वाहन चालकों को कम दृश्यता में सावधानी से चलने को कहा गया है। नदी-नालों के पास जाने या नौका विहार करने से बचने की भी सलाह दी गई है।
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