
देहरादून। परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के पावन सानिध्य में सकल दिगंबर जैन समाज एवं श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः सात बजे नित्य नियम पूजन एवं मंदिर में श्रीजी की शांतिधारा के साथ हुआ। इस अवसर पर जैन मिलन शिवालिक के सदस्यों ने श्रीजी के चरणों में अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया।कार्यक्रम के दौरान पूज्य पूर्णमति माताजी के चातुर्मास में सेवाएं देने वाले सेवकों तथा दशलक्षण महापर्व के दौरान व्रत धारण करने वाले श्रद्धालुओं के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों और सेवा कार्यों के प्रति समर्पण के लिए सभी को उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया।सेवकों में श्री अमित जैन चुने वाले, दिनेश जैन, सचिन जैन, मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन, मुकेश जैन, सिम्मी जैन एवं सुप्रिया जैन को सम्मानित किया गया। वहीं दशलक्षण महापर्व के व्रतधारियों रानो जैन, ज्योति जैन, प्रीति जैन, सोनम जैन, हिमांशु जैन, माही जैन, सुभी जैन, ऋतु जैन, सिद्धार्थ जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं को उपहार भेंट किए गए।जुबिन नौटियाल के आगमन से बढ़ा धार्मिक आयोजन का उल्लासकार्यक्रम का विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला, जब सुप्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल जैन धर्मशाला पहुंचे। उन्होंने परम पूज्य पूर्णमति माताजी के दर्शन कर उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भक्ति संगीत की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।वर्षायोग समिति के अध्यक्ष राजीव जैन, आशीष जैन, मंत्री संदीप जैन, नेहा जैन, कावेरी ज्वेलर्स के आशीष जैन, सूर्य कंस्ट्रक्शन के दिनेश जैन एवं राजीव जैन, मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन तथा प्रचार-प्रसार से जुड़े अंकुर जैन और अनुज जैन ने जुबिन नौटियाल का स्वागत किया।इस अवसर पर जुबिन नौटियाल ने भक्ति संगीत के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भजन गाने और सुनने से मन को शांति मिलती है। संगीत और ईश्वर के नाम का संगम ध्यान जैसी अनुभूति प्रदान करता है तथा तनाव एवं चिंता कम करने में सहायक हो सकता है। धार्मिक आयोजनों में मंत्रों और भजनों की ध्वनि सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। भक्ति मनुष्य में अहंकार को कम कर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण की भावना को मजबूत बनाती है।उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज को आपस में जोड़ने के साथ सामुदायिक एकता और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। ऐसे आयोजनों की भारतीय धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।श्रद्धा के साथ संपन्न हुई सांध्यकालीन आरतीकार्यक्रम के अंत में सांध्यकालीन आरती श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने पूज्य पूर्णमति माताजी के सानिध्य में धर्मलाभ अर्जित किया। आयोजन में सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी, श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति के सदस्य, जैन भवन कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं सदस्य, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बाहर से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





