जिलाधिकारी देहरादून के हस्ताक्षर स्कैन कर बना दिया फर्जी नियुक्ति पत्र , नियुक्ति पत्र भी कलेक्ट्रेट परिसर में अभ्यर्थी को सौंपा! ऐशे नटवरलाल को देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार : – myuttarakhandnews.com


देहरादून जिला अधिकारी कार्यालय :सोचिए यदि कोई व्यक्ति आपको कहता है कि वह आपकीनौकरी जिलाधिकारी कार्यालय में लगा देगा ।साथ ही वो अपने आप को लेवल 2 अधिकारी भी बताता है । जिसके पहचान पत्र उसके पास मौजूद हो । आप भी उसे एक उच्च अधिकारी समझ ,उसकी बातों में यकीन कर कागजों के नाम पर मुँह मांगी रकम उसे दे देते है । आपको जिलाधिकारी कार्यालय में डेटा ऑपरेटर के पद का नियुक्ति पत्र भी मिल जाता है जिस पर जिला अधिकारी महोदय के हस्ताक्षर भी मौजूद है । नियुक्ति पत्र भी आपको कलेक्टर ऑफिस में ही दिया जाता है । कही से भी आपको कोई फ़्रॉड या धांधली की आकांशा नहीं होती ,लेकिन आपको ठगी का एहसास तब होता है जब आप जाते हैं जिलाधिकारी कार्यालय जॉइनिंग के लिए,तो आपको पता चलता है कि आपकी कभी नियुक्ति हुई नहीं थी और डीएम के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। आपको यकीन नहीं आयेगा की आपके साथ इतना बड़ा खेल हो गया ।मामला :जगदीश सिंह पुत्र श्री भरत सिंह निवासी-कृष्णा एक्लेव आमवाला तरला सहस्त्रधारा रोड़ देहरादून के द्वारा दी गयी शिकायत का है । उन्होंने नजदीकी थाने में बताया कि उनके पडोस मे रहने वाले एक व्यक्ति के माध्यम से उनकी पहचान अवनीश भट्ट नाम के एक व्यक्ति से हुई, अवनीश भट्ट द्वारा अपना पहचान पत्र दिखाते हुए स्वंय को उत्तराखण्ड सचिवालय में राज्य सम्पत्ति विभाग में वर्ग-2 का अधिकारी बताया ।जगदीश जी की पुत्री शिवानी मुयाल ने बीबीए किया था तो जगदीश जी ने आरोपी अवनीश भट्ट से प्रभावित हो उसे अपनी बेटी की कही जॉब लगवाने की बात की । जिस पर तथाकथित अवनीश भट्ट ने जिलाधिकारी कार्यालय देहरादून में डाटा ऑपरेटर के पद पर उसकी नियुक्ति लगवाने की बात कही , तथा उसके लिये आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के एवज में उनसे 20000 रू0 की मांग भी की , जो की अवनीश भट्ट ने दिए नम्बर पर गूगल पे के माध्यम से ट्रांसफर किये ।साथ ही अपनी पुत्री के सभी आवश्यक प्रमाण पत्र की ओरिजनल ही अवनीश भट्ट को दे दिये। एक सप्ताह पश्चात अवनीश भट्ट ने जगदीश जी की पुत्री को एक नियुक्ति पत्र दिया जो जिलाधिकारी कार्यालय से जारी किया गया था। नियुक्ति पत्र को लेकर जब पिता पुत्री जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे तो कार्यालय में उंनको मालूम हुआ कि नियुक्ति पत्र ही फर्जी है।जब उंनको ठगी का एहसास हुआ तो कोतवाली नगर में मु0अ0सं0 71/24 धारा 420, 467, 468, 471 भादवि दर्ज किया गया ।
जांच में पता चला कि अपराधी का असली नाम भीसंजय कुमार पुत्र स्व0 प्रेमदास निवासी ग्राम गिदरासू पो0ओ0 अदाणी पट्टी पटवालस्यूँ, ब्लॉक कल्जीखाल, जिला पौडी गढवाल, उम्र 34 वर्ष है जो कि ख़ुद को अवनीश भट्ट बताता है ।उस अभियुक्त के खिलाफ एक अन्य मामला भी दर्ज पाया गयाजो किश्री अनमोल गुप्ता पुत्र श्री मनोज गुप्ता निवासी 52 आढ़त बाजार हाल त्रिरूपति ट्रेवल्स प्रिन्स चैक देहरादून द्वारा कोतवाली नगर में दर्ज करवाया गया था । उनका कहना था कि प्रिन्स चैक पर त्रिरूपति ट्रेवल्स नाम से उनका व्यवसाय है, दिनांक 18 जनवरी 24 को उनकी दुकान पर एक लड़का आया, जिसने अपना नाम संजय कुमार पुत्र प्रेमदास निवासी 56 जेल कचहरी पौड़ी गढ़वाल बताते हुए उनकी दुकान से एक स्कूटी संख्या: यू0के0-07-टीडी-5926 किराये पर ले गया था, जो त्रिरूपति ट्रेवेल्सध्अनमोल गुप्ता पुत्र मनोज गुप्ता 2/1 त्यागी रोड़ के नाम पर रजिस्टर्ड है। शुरू के दस दिनों तक स्कूटी का किराया दिया गया ,उसके बाद ना तो वह फोन उठा रहा था ,ना गाड़ी वापस कर रहा है । इस सम्बन्ध में थाना कोतवाली नगर में मु0अ0सं0 70/2024 धारा 406 भादवि दर्ज की गयी ।जांच के दौरान 19 फरवरी 2024पुलिस मुखबिरों से खबर मिली कि मुकदमें में वांछित अभियुक्त संजय कुमार पुत्र स्व0 प्रेम दास को रेलवे स्टेशन के पीछे बारात घर के पास से स्कूटी संख्या: यू0के0-07-टीडी-5926 के साथ मौजूद है , वहीं से उसकी गिरफ्तार की गयी ।बी0ए0 पास अभियुक्त ने बताया कि है कचहरी में नैना फोटो स्टेट के नाम से एक दुकान मे नोटरी व अटैस्टेड का काम करने के दौरान राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों में अलग-अलग पद की अवनीत भट्ट के नाम से फर्जी पहचान पत्र तथा अवनीत भट्ट व संजय कुमार के नाम से अलग-अलग आधार कार्ड बनाये गये, जिससे उसने समाज कल्याण विभाग में पेन्शन, वृद्धावस्था पेंशन, आर्थिक योजना तथा श्रम विभाग में लोन का पैसा सेटेलमेन्ट का झांसा देकर कई लोगों से पैसों की ठगी की गयी।
मोबाइल ऐप्प Picsart और Pixelleb नाम से 02 एप से ये नाम परिवर्तन कर पहचान पत्र तथा सरकारी आदेशों पर एडिटिंग कर हस्ताक्षर व मोहर स्कैन कर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।इसके पास से कई विभागों के फर्जी पहचान पत्र, अवनीश भट्ट के नाम से बनाये गये थे । तथा संजय नाम से ओरिजनल कागजात भी मोजूद है । अभी जांच की जा रही है कि इन फर्जी पहचानो से ये व्यक्ति कितनो के साथ ठगी कर चुका है ।



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